Gwalior News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ककैटो पेहसारी बांध से निकली एक सदी से अधिक पुरानी नहर को ठीक करने के लिए जल संसाधन विभाग ने टेंडर जारी कर दिए हैं। सांक-नून पीकअप नहर को ठीक करने के लिए जल संसाधन विभाग ने बारिश के ठीक पहले टेंडर जारी किया हैं। बारिश के मौसम में सभी प्रकार के निर्माण कार्य बंद हो जाते हैं। ऐसे में इस नहर को ठीक करने का कार्य अब बारिश के बाद ही हो पाएगा। ऐसे में इस साल इस नहर से भरे जाने वाले, छोटा रायपुर, बड़ा रायपुर, वीरपुर, हनुमान बांध, गिरवाई एवं मामा का बांध सहित हिम्मतगढ़ आदि बांधों को भरा जा सकेगा।

ककैटो पेहसारी बांध से निकली नहर करीब 5 किलोमीटर आगे जाने के बाद दो हिस्सों में बट जाती है। एक नहर तिघर बांध के लिए आती है तो दूसरी सांक नून नहर सीधे जाकर छोटा रायपुर एवं बड़ा रायपुर बांध में मिलती है। इन बांधों को इसी नहर के जरिए भरा जाता है। वहीं पेहसारी बांध से निकलने के करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर सांक नून नहर दो हिस्सों में बट जाती है, इस नहर का दूसरा भाग हिम्मतगढ़ बांध सहित अन्य बांधों को भरने के लिए निकलती है। इस नहर से एक ओर जहां बरई के पास बने छोटा रायपुर बड़ा रायपुर सहित अन्य बांधों को भरा जाता है। वहीं दूसरी ओर शीतला माता के आगे बने हिम्मतगढ़ बांध को भरा जाता है।

90 प्रतिशत पानी हो जाता है लीकेज: सांक नून नहर की सतह खराब होने एवं जगह-जगह से टूट जाने के कारण इसमें छोड़ा गया 90 प्रतिशत पानी लीकेज एवं सीपेज में खत्म हो जाता है। इसके कारण इसका लाभ किसान एवं आमजनों को नहीं मिल पाता है। इस बांध की सतह को पक्का करने एवं इसकी दीवारों को ठीक करने के लिए शासन ने 17 करोड़ रुपये सेंशन किए हैं। लेकिन बारिश में यह कार्य प्रारंभ नहीं हो सकेगा।

बांधों के भरने से बढ़ जाता भू जलस्तरः वीरपुर, गिरवाई, मामा का बांध एवं हिम्मतगढ़ सहित इसके रास्ते में बने अन्य छोटे-छोटे बांधों को भर दिया जाता है तो आसपास के पूरे क्षेत्र का भूजलस्तर बढ़ जाता। हालांकि छोटा रायपुर एवं बड़ा रायपुर बांध इस नहर से सबसे पहले भरे जाते हैं, लेकिन इन दोनों बांधों की सतह पथरीली है, इसके कारण यहां पर पानी जमीन में नहीं जा पाता है। इसके कारण यहां के क्षेत्र में भू जलस्तर भी करीब 300 फीट के नीचे है।

वर्जन-

बांधों को भरने वाली सांक-नून पीकअप बीयर के संधारण कार्य के टेंडर जारी हो चुके हैं। हालांकि इसके टेंडर पूर्व में भी जारी किए गए थे, लेकिन उस समय किसी ठेकेदार ने टेंडर नहीं उठाए थे, इसलिए यह कार्य लेट हो गया है। हालांकि हम प्रयास कर रहे हैं कि इसे समय पर पूरा किया जाए।

राजेश चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग

Posted By: vikash.pandey

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