Gwalior News: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। बहोड़ापुर छेत्र के जनकताल के समीप पहाड़ी पर स्थित 160 वर्षों से अधिक पुराना ऐतिहासिक धरोहर को अपने आंचल में समेटे पाषाण पत्थरों से बना भेलसा बाली माता का मंदिर अब जीर्ण-शीर्ण होता जा रहा है। रखरखाव के अभाव एवं बारिश के चलते मंदिर का काफी भाग क्षतिग्रस्त हो गया है। जिससे यहां कभी भी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

भेलसे वाली माता का मंदिर माता के भक्तों में विशेष स्थान रखता है। ये शहर का एक मात्र ऐसा मंदिर है जिसमे माँ तुलजा भबानी की मूर्ति विराजमान है। नवरात्रों में यंहा हजारों की संख्या में भक्त आते है। पर इस वर्ष भक्तों का यहां पहुंचना खतरे से खाली नहीं है। बारिश और रखरखाव के आभाव के चलते मंदिर की दीवारे दरकने लगी है। मुख्य द्वार के ऊपर का आधा हिस्सा टूट कर गिर गया है। जिससे मुख्य द्वार से गुजरना खतरे से खाली नही है। ऐसे में नवरात्र के दौरान यंहा आने वाले भक्तों की सुरक्षा एक बड़ा संकट है। मंदिर के पुजारी प्रमोद भेलसे का कहना है कि दीवारों से दरकते पत्थर और मुख्य द्वार के ऊपर की हिस्से से गिरते पत्थर से यंहा आने जाने वाले कभी भी घायल हो सकते है। मुख्य द्वार के ऊपर का हिस्सा काफी कमजोर हो गया है। जो कभी भी गिर सकता है। हम खुद मंदिर में जाने के लिए अपनी जान को खतरे में डालते है तब जाकर मंदिर तक पहुच पाते है। हमे अपनी नही नवरात्र में यंहा आने वाले भक्तों की ज्यादा चिंता है। ऐसे मे अगर किसी भक्त के साथ अनहोनी हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मंदिर की जर्जर हालत से प्रशासन को भी अबगत कराए हुए काफी दिन हो गए पर कोई सुनवाई नही हुई अगर जल्द ही यंहा मरम्मत कार्य नही हुआ तो दर्शन करने आने बाले हजारों भक्तों की जान को खतरा बना रहेगा।

Posted By: anil.tomar

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