ग्वालियर, नईदुनिया रिपोर्टर। शहर को स्मार्ट तभी बनाया जा सकता है, जब उच्च, मध्यम के साथ निम्न वर्ग के बच्चे भी स्कूल जाएंगे। स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को कलेक्टर अनुराग चौधरी अपनी टीम के साथ शहर भ्रमण पर निकले। वे ऐसे स्थानों पर पहुंचे, जहां बस्तियां हैं। यहां रहने वाले परिवारों से उन्होंने मुलाकात की। पैरेंट्स से पूछा गया कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं या नहीं। कुछ पैरेंट्स ने सच तो बताया किसी ने कलेक्टर के डर की वजह से झूठ बोलते हुए कह दिया कि वे अपने बच्चों को नजदीकी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजते हैं। लेकिन पैरेंट्स की पोल उनके बच्चों ने कलेक्टर से मुलाकात के साथ खोल दी। उन्होंने कह दिया वे स्कूल नहीं जाते हैं। मम्मी-पापा उन्हें किसी न किसी काम में व्यस्त कर देते हैं। मौके पर मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी से सवाल करते हुए कलेक्टर ने कहा कि आखिर कमजोर तबके के बच्चे स्कूल की दहलीज पर कदम क्यों नहीं रख पा रहे हैं।

स्थिति जानने के लिए पूछे सवाल

कलेक्टर चौधरी के पूछने पर कुछ बच्चों ने स्कूल जाने की बात कही। स्थिति का पता करने के लिए उन्होंने बच्चों से एक-एक कर ए,बी,सी,डी सुनी। जिन बच्चों ने पूछे गए सवाल का ठीक से जवाब दिया, उन्हें तत्काल टॉफी दी गई। पूर्व में दिए गए निर्देशानुसार कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी से भी कहा कि वे अपनी तरफ से बच्चों को टॉफिया वितरित करने को कहा, लेकिन उनके पास टॉफियां नहीं थीं।

इस पर भी उन्होंने शिक्षा अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि जब आपके पास बच्चों को देने के लिए टॉफियां नहीं हैं तो उन्हें कैसे स्कूल तक लेकर जा पाएंगे। अंत में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की टीम को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने प्रयास तेज करें। हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाएं। क्योंकि हमें ग्वालियर को लेवर का शहर नहीं, डॉक्टर और इंजीनियर्स का शहर बनाना है।

Posted By: Nai Dunia News Network