Gwalior Oxygen Crisis News: अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। जिला अस्पताल मुरार में आक्सीजन प्लांट ताे लग गया, लेकिन इसकी क्षमता काफी कम है। ऐसे में इसके जरिए केवल बीस बेड पर ही आक्सीजन सप्लाई हाे सकेगी। दरअसल प्लांट हवा से आक्सीजन एक मिनट में महज 200 लीटर ही तैयार कर सकेगा। जबकि जिला अस्प्ताल में आइसीयू ही 20 बेड का बना हुआ है। यदि 10 लीटर आक्सीजन प्रति मिनट मरीज लेता है तो 20 बेड पर आक्सीजन की सप्लाई हो सकेगी। यदि किसी मरीज ने एक मिनट में 50 लीटर आक्सीजन ली तो फिर 15 बेड पर ही आक्सीजन पहुंच सकेगी। कुल मिलाकर आक्सीजन सिलिंडर का सहारा जिला अस्पताल के साथ-साथ सिविल अस्पताल, जेएएच के आइसीयू, कार्डियक विभाग को लेना ही पड़ेगा। जबकि 300 सिलिंंडर जो गायब हुए, उनका अता पता अभी तक स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन व जेएएच प्रबंधन नहीं लगा सका है। आक्सीजन को लेकर अभी भी विभागों का सुस्त रवैया है, अधिकारी दूसरी लहर में मचे काेहराम को भूल चुके हैं। गौरतलब है कि दूसरी लहर अप्रैल माह में आई थी। एक माह में ही 35 हजार लोग काेराेना संक्रमित हुए थे। जिसमें से करीब डेढ़ हजार लाेगाें की जिंदगी कोरोना निगल गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मरने वालों का आंकड़ा अभी महज 731 बता रहा है, लेकिन हकीकत में आंकड़ा इससे अधिक है। आक्सीजन को लेकर त्राही-त्राही मच गई थी। आक्सीजन की कमी के कारण कई लाेगाें की जान चली गई। 27 अप्रैल को कमलाराजा अस्पताल में ही करीब 8 लोग आक्सीजन की कमी से मौत का शिकार बन गए थे। इसके बाद शासन ने सबसे पहले आक्सीजन की पूर्ति के लिए आक्सीजन प्लांट और टैंक लगाने की बात कही थी। शासन के दिशा निर्देश पर जेएएच में चार आक्सीजन प्लांट लगाए गए, पर चालू एक को ही स्थानीय प्रबंधन करा सका है। वहीं सनफार्मा का एक प्लांट तो ट्रायल में ही फेल हो गया था। इसके साथ ही चार आक्सीजन टैंक लगाने के लिए टेंडर भी हुआ, लेकिन कोई कंपनी आगे नहीं आई। इसलिए चार आक्सीजन टैंक लगाने का काम भी अधर में अटक गया है। जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल में प्लांट लगा, पर चालू नहीं हो सका। इधर मोहना, हस्तिनापुर व डबरा में भी अभी तक प्लांट नहीं पहुंचा है। यहां फाउंडेशन जरूर बनकर तैयार हाे गया है।

Posted By: vikash.pandey

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