Gwalior PG Doctor News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश के 13 मेडिकल कालेजों से पीजी की पढ़ाई करने वाले तीसरे,चौथो, पांच वें सेमेस्टर के विद्यार्थियों को तीन महीने की सेवाएं स्वास्थ्य विभाग में देना अनिवार्य है। लेकिन एनएमसी की अधिसूचना जारी होने के दो महीने बाद इंदौर को छोड़कर बाकी सभी शहरों के स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पतालों को पीजी डाक्टरों के आने का इंतजार है। इसके पीछे भोपाल से पीजी डाक्टरों को स्वास्थ्य विभाग में भेजने के आदेश न आने का कारण बताया जा रहा है। जबकि एनएमसी के अनुसार वही पीजी छात्र फाइनल ईयर की परीक्षा में बैठने के हकदार होंगे जिन्होंने तीन महीने अपनी सेवाएं जिला अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में दी होंगी। गौरतलब है कि नए आदेशों के मुताबिक, एकेडमिक ईयर 2020-21 से ही इन नियमों को लागू कर दिया गया है। इसके मुताबिक एमडी या एमएस करने वाले सभी पीजी स्टूडेंट्स तीन महीने के लिए जिला अस्पताल या किसी जिला स्वास्थ्य केंद्र में सेवाएं देंगे। यह रोटेशन तीसरे, चौथे और पांचवें सेमेस्टर में शामिल किया गया है, जिसे जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (डीआरपी) नाम दिया गया है। दरअसल, जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को दूर करने के मकसद से यह बदलाव किया गया है। भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 के तहत सभी मेडिकल कालेजों के लिए अनिवार्य होगा।

वरिष्ठ डाक्टर देंगे प्रशिक्षण-

नए नियम के तहत जिला अस्पताल में तैनात होने के बाद मेडिकल स्टूडेंट को ट्रेनिंग के लिए सीनियर डाक्टर की निगरानी में रखा जाएगा। स्टूडेंट को ओपीडी, आपातकालीन, आईपीडी के अलावा रात में भी ड्यूटी देनी होगी। संबंधित जिला अस्पताल को भी पहले से इस रोटेशन के बारे में मेडिकल छात्रों की सूची उपलब्ध हो जाएगी, ताकि उन्हें यह पता रहे कि कौन- कौन छात्र नए रोटेशन के तहत उनके यहां सेवाएं देने वाले हैं।

183 पीजी छात्र-

गजराराजा मेडिकल कालेज में पीजी करने वाले छात्रों की संख्या 183 है। हर छात्र को तीन महीने सेवाएं देने के लिए जिला अस्पताल या स्वास्थ्य केंन्द्र जाना होगा। हर तीन महीने में 45 पीजी छात्रों को अपनी सेवाएं देने के लिए जिला व स्वास्थ्य केंद्र में जाना होगा। जिससे स्वास्थ्य विभाग को 45 डाक्टरों की उपलब्धता पूरे वर्ष भर बनी रहेगी। इससे जहां डाकटरों की कमी से राहत मिलेगी तो वहीं मरीजों को विशेषज्ञता हासिल करने वाले चिकित्सकों का परामर्श मिलेगा।

इनका कहना है-

इंडेक्स कालेज के पीजी छात्र तीन महीने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए आने लगे हैं। जबकि एम्वाय कालेज से बात हुई है जल्द ही उनके पीजी छात्र भी मिलेंगे जिससे डाक्टरों समस्या हल होगी।

डा बीएस सत्या, सीएमएचओ इंदौर

जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक में डाक्टरों की कमी है। हालात यह हैं कि एक डाक्टर की ड्यूटी दो दो दिन की अलग अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर लगानी पड़ रही है। यदि पीजी छात्र मिल जाते तो राहत मिलती ।कई बार कालेज प्रबंधन से पत्राचार कर चुके पर कोई सुनवाई नहीं है।

डा मनीष शर्मा, सीएमएचओ

Posted By: anil tomar

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