Gwalior Pollution Control Board: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की सर्जरी की गई है। पूरे प्रदेश को दो जोन में बदलने के साथ अब हर कर्मचारी व अधिकारी के कार्य की प्रतिवर्ष समीक्षा की जाएगी। बोर्ड के लिए अनपयोगी साबित होने वाले 17 कर्मचारियों को स्वेछिक सेवानिवृति दी जा रही है। बोर्ड के अफसरों का कहना है कि हर वर्ष कार्य की समीक्षा के आधार पर अधिकारी व कर्मचारी की नौकरी तय की जाएगी। जिले स्तर पर कलेक्ट्रेट में प्रदूषण बोर्ड का कार्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है। जिससे कलेक्टर के निर्देश पर मायनिंग से होने वाले प्रदूषण पर कंट्रोल किया जा सके। ग्वालियर के आसपास के जिलों में ग्वालियर से ही निगरानी रखी जाएगी। शहर व उसके आसपास लगी इंडस्ट्री से फैल रहे वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। हर जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्र में प्रदूषण का मापन करने के साथ उसके नियंत्रण को लेकर रणनीति बनाकर उसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। हालांकि ग्वालियर से लगे जिले भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी व मुरैना में जिला स्तर पर कार्यालय अभी नहीं खोले जा रहे हैं।

शहर में तीन साल से बंद पड़ा आनलाइन केंद्र: फूलबाग व सिटी सेंटर पर आनलाइन आंकड़ा दिखाने के लिए सब स्टेशन बनाया गया है। जिससे चौराहों पर लगी स्क्रीन पर आनटाइम प्रदूषण की स्थिति आ सके, लेकिन पिछले तीन साल से फूलबाग पर लगी मशीन बंद पड़ी है। जिस पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अफसरों ने कभी ध्यान नहीं दिया। इसी तरह से जिले में प्रस्तावित दो अन्य स्थानों पर आनलाइन सब स्टेशन बनाने के लिए जगह चिन्हित नहीं कर सका था। बाड़े पर स्क्रीन तो लगाई पर आंकड़े मापने के लिए मशीन लगाने के लिए जगह की उपलब्धता प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अफसर नहीं करा सके थे।

शहर में तेजी से बढ़ रहा पीएम10 का मान: शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों के आसपास खली जमीन पर जमी धूल, खुदी सड़कों के कारण हवा चलने पर धूल का गुब्बारा उठता है। जिसके कारण लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता था। धूल के पार्टीकल जब सांस के माध्यम से श्वांसनली में पहुंचकर जमा होते तो लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगती है। खासकर अस्थमा मरीजों को यह समस्या अधिक होती है। हालांकि वाहनों से निकलने वाला धुआं सांस रोगी बना रहा है।

पिछले तीन दिन के प्रदूषण के आंकड़े

दिनांक पीएम10 पीएम2.5

17 मई 225.1 59.0

18मई 214.9 68.4

19मई 245.1 67.6

वायु गुणवक्ता

एक्यूआइ स्वास्थ्य पर प्रभाव

0-50 अच्छा

50-100 माध्यम

100-150 अस्वस्थ्यकर, संवेदनशील समूह के लिए

150-200 अस्वस्थ

200-300 बहुत अस्वस्थ्य

300-500 खतरनाक

वर्जन-

भिंड का इंडस्ट्री एरिया ग्वालियर से लगा है और मुरैना पास में तथा दतिया और शिवपुरी में कोई इंडस्ट्री है नहीं। इसलिए ग्वालियर से ही इन जिलों में निगरानी रखी जाएगी। बाकी जिलों में कलेक्ट्रेट में ही कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है। हर कर्मचारी व अधिकारी के कार्य की प्रतिवर्ष समीक्षा होगी। अनपयोगी होने पर उसे बीआरएस दिया जाएगा।

अच्युतानंद मिश्रा, सदस्य सचिव मप्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड

Posted By: vikash.pandey

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