Gwalior Preparations of Fair: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। मेला प्राधिकरण के पास फंड नहीं है। इसलिए मेला की तैयारियों का काम भी धीमी गति से चल रहा है। अब इंतजार मेला की दुकानों की बुकिंग और टेंडर होने का है। जिससे होने वाली आय से ही मेला की तैयारियों पर व्याय किया जा सकेगा। हालात यह है कि पिछले दो साल से बिजली,सफाई, मरम्मत,टीन ,टेबल,कुर्सी, तख्त आदि के ठेकेदारों का भुगतान नहीं हो सका। हालात यह है कि यदि इस बार मेला का आयोजन टल जाता तो मेला कर्मचारियों को वेतन भुगतान के भी लाले पड़ जाते। हालात यह है कि पिछले दाे साल में मेला में ठेकेदारी करने वाले वालों का भुगतान प्राधिकरण ने रोक कर रखा है। पिछले सालों में मेला और वैवाहिक गार्डनों से प्राधिकरण को कितनी आय और व्याय हुआ इसका लेखाजोखा भी फाइलो में बंद है। इससे यह भी किसी की जानकारी में नहीं है कि आखिर करोड़ों रुपये की आय करने वाले मेला परिसर के रखरखाव के लिए भी प्राधिकरण पर आखिर पैसा क्यों नहीं है।

2014 तक कार्यकारणी में समक्ष रखा जाता था आय व्याय-

मेला अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2014 तक मेला से होने वाली पूरी आय और व्याय का लेखाजोखा कार्यकारणी के समक्ष रखा जाता था। लेकिन जब से कार्यकारणी भंग हुई और मेला की बागडोर भोपाल और स्थानीय अधिकारियों को मिली जिसके बाद मेला की आय और व्याय की जानकारी फाइलों में बंद हो गई।

इस तरह से होगा मेला में होने वाले व्याय का प्रबंध

मेला सचिव निरंजन श्रीवास्तव का कहना है कि मेला से होने वाली आय से ही मेला की तैयारियाें पर व्याय किया जाएगा। मेला परिसर में करीब दाे हजार दुकानों को इस बार किराए पर देने का लक्ष्य रखा गया है। यदि प्रत्येक दुकान से दस हजार रुपये की आय होती है तो करीब दो करोड़ रुपये एकत्रित होंगे। इसी तरह से पार्किंग,बिजली, फुटपाथ,चबूतरे,दुकान के पीछे की जगह सहित अन्य मदों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। मेला से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की आय होगी जिसमें लगभग एक करोड़ रुपये तो मेला में बिजली बिल पर ही खर्च हो जाता है। इसके अलवा रंगाई,पुताई,मारम्मत, सफाई,सुरक्षा आदि पर खर्च होता, इसके अलावा मेला में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि पर खर्च होगा। इस तरह से जो आय होगी उतना ही करीब व्याय हो जाता है।

हर प्रदेश का होता

ग्वालियर व्यापार मेला के पूर्व अध्यक्ष अनुराग बंसल का कहना है कि 2014 तक मेला में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देशभर से प्रख्यात बादक,शास्त्रीय संगीत घराने के कलाकार सिरकत करते थे। यही नहीं मेला में सभी प्रदेशों का सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेाजन किया जाता था। जिसके लिए शहर और उसके आसपास के जिलों में रहने वाले अन्य प्रदेशों के लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रण दिया जाता था। जिसके लिए मेला आयोजन से चार महीने पहले से तैयारियां शुरू कर दी जाती थी। जिसमें शहर के सभी गणमान्य लोगों को बैठक में बुलाया भी जाता था। लेकिन अब यह सब बंद है हालत यह है कि न अध्यक्ष है और नहीं मेला की भव्यता को लेकर विचार हैं। अधिकारी भी इस दिशा में खानापूर्ति कर रहे हैं।

इनका कहना है-

मेला का शुभारंभ 25 दिसंबर को होगा। उसकी तैयारियों के लिए फंड की कमी नहीं आने दी जाएगी। मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन संबंधी जानकारी मैं लेता हूं इसके विषय में आपको कल बता सकूंगा। जिन ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है वह भी मेला से पहले किया जाएगा।

ओमप्रकाश सकलेचा,सूक्ष्म लघु उद्योग मंत्री मध्य प्रदेश

Posted By: anil tomar

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