Gwalior Property Tax News: दीपक सविता, ग्वालियर नईदुनिया। नगर निगम के लिए संपत्तिकर में इजाफा नहीं होना बड़ी परेशानी बना हुआ है। इसका कारण लोगों के अवैध मकान बनाना और उनका संपत्तिकर जमा नहींं करना है। शहर में 700 अवैध कालोनियां हैंं, इनमें निगम ने विकास करा दिया, लेकिन यहां से टैक्स नहीं मिलता है। निगम ने इस साल मात्र 1 लाख 3 हजार संपत्तियाें से 73.50 करोड़ रुपये संपत्तिकर वसूला था, लेकिन इस साल यह आंकड़ा 100 करोड़ के पार पहुुंच सकता है। निगम का अनुमान है कि वर्तमान में करीब 3.5 लाख संपत्तियां नगर निगम सीमा में हैं, लेकिन वर्तमान में 1.3 लाख संपत्तियाें से ही टैक्स वसूला जा रहा है। वहीं शहर में अवैध कालोनियों पर कार्रवाई कर फार्म फोर बनाने के लिए भी तैयारियां चल रही हैं। साथ ही अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। निगम में सभी संपत्तियाें की गिनती के लिए नगर निगम सैटेलाइट का सहारा लेने जा रहा है। इससे पहले भी नगर निगम ने 10 साल पहले वर्ष 2011 में सैटेलाइट का सहारा लेकर 50 हजार संपत्तियाें से अचानक इजाफा कर निगम सीमा में 2 लाख संपत्तियां होने का दावा किया था। नगर निगम सीमा में करीब 3.5 लाख संपत्तियां हैं। इनमें से 30 हजार ऐसी संपत्तियां हैं, जो कि शासकीय भूमि पर जबरन कब्जा कर बनाई गई हैं। इनसे निगम टैक्स नहीं ले सकता है। इसके साथ ही 30 से 40 हजार राज्य सरकार की संपत्तियां हैं, जिनसे टैक्स नहीं वसूला जाता है। इसी प्रकार 70 हजार के करीब ऐसी संपत्तियां हैं, जिनके पास सिर्फ नोटरी है। ऐसे में इनसे भी संपत्तिकर नहीं वसूला जा सकता है। इसके बाद शहर के अंदर करीब एक लाख संपत्तियां ऐसी हैं, जिनसे टैक्स लिया जा सकता है, लेकिन उन तक अभी भी निगम की पहुंच नहीं बन पाई है। ऐसी संपत्तियाें की पहचान करने के लिए नगर निगम सैटेलाइट से नगर निगम सीमा के प्रत्येक मकान का फोटो खिंचवाकर पूरा नक्शा तैयार करा रहे हैं।

भवन शाखा करे कार्रवाई तो राजस्व पहुंच सकता है 200 करोड़ के पारः शहर के अंदर 696 अवैध कालोनियां हैंं इसके साथ ही लगातार शहर के चारों कोनो में अवैध कालोनियां काटी जा रही हैं। वहीं शहर में 427 ऐसी अवैध कालोनियां हैं, जहां के निवासियाें से नगर निगम विकास शुल्क जमा कराकर उन्हें वैध कर सकती है। विकास शुल्क में 50 प्रतिशत क्षेत्रवासी देते हैं और 50 प्रतिशत राज्य सरकार और नगर निगम खर्च करता है।

Posted By: vikash.pandey

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