ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शरीर को फिट रखने और शहर के लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की मंशा के साथ तैयार किया गया स्मार्ट सिटी का पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम फेल साबित हो रहा है। इस प्रोजेक्ट का संचालन करने वाली याना कंपनी और प्रोजेक्ट तैयार कराने वाले स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अफसर भी इन साइकिलों के संचालन में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि शहर के 50 स्टेशनों पर 500 से अधिक साइकिलें खड़े-खड़े धूल फांक रही हैं। न तो लोग इन साइकिलों के संचालन में रुचि ले रहे हैं न ही स्मार्ट सिटी के अफसर इन्हें प्रमोट करने के कोई प्रयास कर रहे हैं। इसके चलते जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पांच करोड़ रुपये बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

स्मार्ट सिटी के अफसरों की सोच थी कि लोग एक से दूसरी जगह जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा साइकिलों का उपयोग करें। इसके लिए याना कंपनी को ठेका दिया गया और साइकिलें खरीदने के लिए खुद स्मार्ट सिटी ने कंपनी को भुगतान किया था। कंपनी ने शहर के सिटी सेंटर में बीएसएनएल आफिस के पास डाकिंग स्टेशन बनाया, इसके अलावा शहर में 50 अन्य स्टेशन तैयार कर वहां साइकिलें खड़ी कर दी गईं। शुरुआत में लोगों ने इन साइकिलों का उपयोग किया, लेकिन धीरे-धीरे साइकिलों को लेकर रुझान कम होता चला गया। रही-सही कसर कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गए लाकडाउन ने पूरी कर दी। अब मेंटेनेंस के अभाव में 50 स्टेशनों पर खड़ी साइकिलें धूल खा रही हैं, जबकि इन्हें चलाने वालों की संख्या अब इक्का-दुक्का ही रह गई है। लापरवाही की स्थिति यह है कि एक चालक साइकिल को लेकर स्टेशन तक पहुंचा तो पांच दिन तक यह साइकिल वहीं खड़ी रही। न तो कंपनी न ही अफसरों ने इसे उठाकर वापस नजदीकी स्टेशन या डाकिंग स्टेशन तक लाने के प्रयास किए। जब लोगों ने इसकी सूचना स्मार्ट सिटी सीईओ को दी तो उन्होंने स्वयं निर्देश देकर इस साइकिल को उठवाया।

बिना अनुमति विज्ञापन पर लगाया जुर्माना

याना कंपनी ने बिना अनुमति साइकिल स्टेशनों पर विज्ञापन करना शुरू कर दिया था। इसको देखते हुए नगर निगम आयुक्त किशोर कान्याल ने कंपनी पर 1.61 करोड़ रुपये से अधिक राशि का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा अब शहर में इन साइकिलों का उपयोग करने वाले बेहद कम हो गए हैं। कंपनी कर्मचारियों द्वारा सुबह वर्कशाप से साइकिलों को निकालकर स्टैंड पर रख दिया जाता है और शाम को इन साइकिलों को वापस वर्कशाप में रख दिया जाता है।

भोपाल-इंदौर में मिल रहा रिस्पांस

ग्वालियर के मुकाबले पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम भोपाल व इंदौर में भी लागू किया गया था, लेकिन इन दोनों शहरों में इस योजना को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। इसके पीछे अफसरों का तर्क है कि ग्वालियर में गर्मी अधिक पड़ने के कारण लोग साइकिलों का उपयोग नहीं करते हैं, जबकि बाकी दोनों शहरों का तापमान यहां के मुकाबले कम रहता है। इस कारण लोग वहां अब भी साइकिलों का उपयोग करते हैं।

यह सही है कि पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम का लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। हम योजना तैयार कर रहे हैं कि कैसे लोगों का रुझान इन साइकिलों के इस्तेमाल के लिए बढ़ाया जाए। जल्द ही इसकी तैयारी की जाएगी।

नीतू माथुर, सीईओ स्मार्ट सिटी

Posted By: anil tomar

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