Gwalior Railway News: ग्वालियर. नईदुनिया ग्वालियर। ग्वालियर से शिवपुरी, झांसी, आगरा, भिंड, इटावा जैसे शहरों को जाने वाली रेल लाइनों पर मवेशियों के झुंड आने से हादसे हो रहे हैं। इन हादसों में जहां मवेशियों की जान चली जाती है, वहीं इंजनों को भी नुकसान होता है। इसके अलावा ट्रेनें लेट होने से रेलवे के संचालन पर भी असर पड़ता है। अब सर्दी के दिनों में कोहरे के कारण मवेशियों के झुंड से हादसों की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसको देखते हुए रेल संरक्षा टीम पशुपालकों को जागरुक करेगी कि वे पटरियों के किनारे अपने मवेशियों को न छोड़ें।

ग्वालियर से विभिन्न शहरों की ओर जाने वाले रेल मार्ग पर आए दिन गौवंश ट्रेन की चपेट में आ जाते है। दोपहर के वक्त रोजाना रेलवे लाइन पर 70-80 बकरियों का झुंड अक्सर देखा जा सकता है। इस झुंड के साथ एक मवेशी पालक होता है। यहां आसपास के कई गांवों के लोग भी बकरियां चराने आते हैं। उन्हें इस बात का कतई डर नहीं रहता है कि अचानक तेज रफ्तार ट्रेन आ गई तो फिर वह इतनी बड़ी संख्या में बकरियों के झुंड को कैसे नियंत्रित कर पाएंगे। अति व्यस्त ग्वालियर-आगरा रेलवे ट्रैक पर भी मवेशियों के ट्रेनों से टकराने से बड़े हादसे टल चुके हैं। बावजूद इसके पशुओं के पटरी पर आने से रोकने के प्रबंध महज कागजों तक सीमित हैं। रेल पटरी पर पशुओं को चराने लाने वाले पालकों पर भी अंकुश नहीं लग सका है। कई बार सांड़ व अन्य जानवरों के लाइन पर आने से हादसे हो चुके हैं। इस रेल मार्ग पर औसत हर दस मिनट में एक ट्रेन निकलती है। ट्रेनों की रफ्तार 120 से 130 किमी होती है। ऐसे में रेलवे ट्रैक पर कोई मवेशी आ जाता है तो ट्रेन के इंजन से टकराकर उसके चीथड़े उड़ जाते हैं। रेलवे की ओर से रेल पटरी के किनारे पशुओं को चराने वालों को जागरूक नहीं किया जाता है। आरपीएफ द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है, लेकिन वह भी अब दिखावे का साबित हो रहा है। ऐसे में अब रेल संरक्षा टीम जागरुकता अभियान चलाने जा रही है।

Posted By: anil tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close