Gwalior Railway News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के कारण दो साल बाद लोग गर्मी की छुट्टियों में खुलकर यात्रा करने के लिए सपरिवार निकल रहे हैं। इसके चलते ट्रेनों में भीड़ बढ़ रही है। इसके अलाव साल में लोगों की यात्रा की आदत भी छूटी है। इसके चलते भीड़ और हड़बड़ी का नतीजा यह है कि ट्रेनों में चढ़ते और उतरते समय हर दिन औसतन पांच यात्री अपना सामान प्लेटफार्म या ट्रेन में ही भूल जा रहे हैं। इस सामान में लैपटाप बैग, सामान से भरा बैग, नगदी से भरा पर्स, जूते, मोबाइल, चार्जर जैसी चीजें शामिल हैं, लेकिन गत माह एक आश्चर्यजनक मामला यह भी रहा कि एक दंपती अपने बच्चे को ही प्लेटफार्म पर भूलकर ट्रेन में सवार हो गया। बाद में आरपीएफ की मदद से उस बच्चे को अपने माता-पिता से मिलवाया गया।

कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 ट्रेनों के पहिए थम गए थे। देशभर में रेलवे ने ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था। इसके बाद श्रमिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें और बाद में संक्रमण की स्थिति कम होने पर धीरे-धीरे ट्रेनों को पटरी पर लाया गया। संक्रमण से बचने के लिए बहुत आवश्यक होने पर ही यात्रियों ने यात्रा करना शुरू किया। ऐसे में गत दो वर्षों से लोग ट्रेनों के माध्यम से छुट्टी मनाने के लिए कहीं नहीं जा पाए। अब संक्रमण की रफ्तार पर लगाम लगने के बाद दो वर्ष बाद लोग खुलकर गर्मी की छुट्टियां मनाने के लिए जा रहे हैं। ऐसे में ट्रेनों में अच्छी-खासी भीड़ चल रही है। दो साल में लोगों की ट्रेन से यात्रा की आदत भी छूट गई है। इसका नतीजा यह है कि लोग अब यात्रा के नियम और कायदे भूल रहे हैं। ऐसे लोग ट्रेन में चढ़ने और उतरने की जल्दबाजी में अपना कीमती सामान भूल जा रहे हैं। इसके चलते आरपीएफ के जवानों की मशक्कत बढ़ गई है। ये जवान अब इस सामान को रिकवर करने के लिए ट्रेनों में भागादौड़ी कर रहे हैं।

केस-1ः तेलंगाना एक्सप्रेस में सवार होकर हैदराबाद से वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन जा रहा एक यात्री अपना बैग ट्रेन में भूल गया। कंट्रोल से मिली सूचना के आधार पर आरपीएफ ने बैग को बरामद किया, तो पता चला कि उसमें 40 हजार रुपए की नकदी रखी हुई थी। आरपीएफ ने यात्री की पहचान सिद्ध होने पर बैग उसे वापस किया।

केस-2ः 13 अप्रैल 2022 को ग्वालियर स्टेशन से गोवा एक्सप्रेस में सवार होकर पुणे जा रहे एक दंपती के साथ उनके तीन बच्चे भी थे। ट्रेन में चढ़ने की हड़बड़ी में दंपती अपने मंझले बेटे को प्लेटफार्म पर ही भूल गए। आरपीएफ के जवानों ने प्लेटफार्म पर खड़े डरे-सहमे बच्चे को पहचान के बाद उसके माता-पिता को सौंप दिया।

फरवरी से अप्रैल के बीच लौटाए ढाई लाख के 40 सामानः आरपीएफ के जवानों ने फरवरी से अप्रैल माह के बीच अलग-अलग ट्रेनों में यात्रियों का ढाई लाख रुपये कीमत के 40 नग सामान रिकवर कर वापस लौटाया है। इसमें एक लाख रुपये से अधिक कीमत के सामान से भरे 25 बैग सहित मोबाइल, लैपटाप, घड़ी, पार्सल पैकेज, कोट, टाइल्स कटर मशीन, आइस बाक्स, बर्तनों से भरा बैग, जैकेट सहित अन्य सामान शामिल है।

मई में हुआ इजाफाः गत 15 अप्रैल से स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में लोगों ने घूमने का प्लान बनाया, तो उन्हें मई माह में टिकटें उपलब्ध हो पाईं। इसी माह में ट्रेनों में यात्रियों की संख्या में दोगुना तक इजाफा हुआ है। कंफर्म सीटों के अलावा लोग आरक्षण खिड़की से वेटिंग टिकट लेकर यात्रा कर रहे हैं। इसका नतीजा है कि अब मई माह में ट्रेनों में सामान छूटने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। रोज प्रतिदिन अलग-अलग ट्रेनों में औसतन पांच यात्रियों का सामान छूट रहा है।

वर्जन-

ट्रेनों में यात्रियों द्वारा सामान भूलने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। हमारे जवान प्रतिदिन ऐसे सामानों को ट्रेन से रिकवर कर जांच-पड़ताल के बाद उसके असली मालिक को वापस सुपुर्द करते हैं।

संजय सिंह आर्या, निरीक्षक आरपीएफ

वर्जन-

लोग गत दो वर्षों से घरों में कैद थे। अब वे यात्रा के लिए बाहर निकल रहे हैं, तो उनमें उत्साह है। ट्रेनों में भीड़ अधिक होने के कारण लोगों की सावधानी और एकाग्रता में कमी आती है। यही कारण है कि वे अपना सामान भूल जाते हैं।

डा. कमलेश उदैनिया, मनोचिकित्सक

Posted By: vikash.pandey

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