- मुरार में शुरू हुआ श्रीराम लीला का मंचन, उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

Gwalior Ramlila News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरार स्थित रामलीला मैदान में श्रीराम लीला का मंचन शुरू हो गया है। शनिवार को रामलीला में नारद मोह एवं श्रवण कुमार वध लीला का मंचन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम शंकर भगवान कैलाश पर्वत पर ध्यान मग्न होकर राम नाम का जाप कर रहे थे। जिसे देख माता पार्वती ने श्रीराम नाम के बारे में पूछा कि यह राम कौन हैं, जिनका आप स्मरण किया करते हैं। तब भोलेनाथ ने भगवान श्री राम की महिमा बताई एवं पृथ्वी पर उनके अवतार लेने के कई कारण बताए। जिसमें एक कारण देवऋषि नारद के श्राप के कारण भगवान विष्णु को नर रूप धारण कर रामलीला करनी पड़ी। पार्वती जी के बार-बार पूछने पर भगवान ने पूरा वृतांत बताया कि जब नारद जी तपस्या में लीन थे तब इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा। परंतु कामदेव असफल होने के पश्चात नारद जी से क्षमा मांगने लगे। जिससे नारद जी में अहम जाग गया और जब नारद जी ने शिवजी को सारा वृतांत सुनाया तो शिव जी ने इस बात को विष्णु जी को बताने को मना किया। परंतु नारद जी न माने और पूरी कहानी विष्णु जी को सुनाई। तब भगवान विष्णु ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक माया रूपी नगरी, जिसके राजा शीलनिधि से नारद जी की भेंट करवा दी और उनकी सुंदर राजकुमारी से मिलकर नारद उन पर मोहित हो गए। राजकुमारी से विवाह करने के लिए नारद जी ने विष्णु जी से उनका सुंदर रूप मांगा। तब विष्णु जी ने उनको अपने सुंदर रूप की जगह वानर का मुख दे दिया। जब नारद जी स्वयंवर में पहुंचे तब सुंदर राजकुमारी ने भगवान विष्णु को जयमाला डाल दी, जिसके बाद नारद जी अपना वानर मुख देख क्रोधित हो गए। नारद जी ने विष्णु जी को नारी विरह का श्राप दिया, जिसके कारण भगवान को अवतार लेना पड़ा।

रामलीला में इसके बाद श्रवण कुमार वध लीला का मंचन हुआ। जिसमें शिकार के धोके में राजा दशरथ का वाण श्रवण को लगा और उनकी मृत्यु हो गई। जिसे जान अंधे माता-पिता ने दशरथ जी को श्राप दिया की जिस तरह पुत्र वियोग में हमारी मृत्यु हो रही है, उसी प्रकार तुम भी पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के अपने प्राण्ा दोगे।

Posted By: anil.tomar

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