Gwalior Station redevelopment: ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेलवे स्टेशन पुनर्विकास के भूमिपूजन की अभी न तरीख तय हो सकी है और ना अतिथि। इस कारण स्टेशन पर निर्माण कार्य में गति नहीं दिख रही है। जब नईदुनिया ने इस परियोजना की हकीकत जानी तो सामने आया कि अभी तक काम के नाम पर सिर्फ रेस कोर्स रोड के रिहायसी आवासों को ही तोड़ा गया है, जबकि अभी रेलवे परिसर के पास से आफिस शिफ्ट होना और स्टेशन बजरिया के होटल हटाने हैं। पुनर्विकास का कार्य 24 महीने में पूरा करना है, अब 23 महीने शेष बचे हैं। इस गति से स्टेशन का पुनर्विकास हुआ तो सालों लग सकते हैं। 23 जनवरी को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक सतीश कुमार स्टेशन पुनर्विकास के कार्य का निरीक्षण करने आ रहे हैं।

उत्तर मध्य रेलवे ने पांच जुलाई 2022 को स्टेशन के पुनर्विकास का टेंडर जारी किया था। टेंडर जारी होने के बाद कंपनी तय करने की गति काफी धीमी रही। इसे तय करने में तीन महीने लग गए। टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने भाग लिया था, जिनमें हैदराबाद की केपीसी । प्राइवेट लिमिटेड को काम मिला है। एयरपोर्ट की तर्ज पुनर्विकास कार्य के तहत नए बिल्डिंग से लेकर यात्री सुविधाओं पर कुल 462.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कानूनी प्रक्रिया जारी होने के बाद इस कंपनी को 16 दिसंबर 2022 से काम शुरू करना था। अभी कंपनी का आफिस बन गया है और कर्मचारी आ गए हैं। रेलवे ने छह जनवरी तक भूमिपूजन की तैयारी की थी, लेकिन अतिथि व तारीख निर्धारित नहीं हो सकी।

निर्माण को गति देने इन बाधाओं को करना होगा दूर

द्यस्टेशन पुनर्विकास का मुख्य निर्माण कार्य सर्कुलेटिंग एरिया में है। रेलवे ने अपनी जमीन होटलों को लीज पर दिया है, जिन्हें अभी खाली नहीं कराया गया है। द्यआरपीएफ थाना, रेलवे कोर्ट शिफ्ट होने हैं। इनकी भी शिफ्टिंग नहीं की जा सकी है। द्यपुनर्विकास की जगह पर 213 पेड़ खड़े हुए हैं। पेड़ों की कटाई भी शुरू नहीं हो सकी है। द्यस्टेशन के पुनर्विकास कार्य में मप्र हाउसिंग बोर्ड की भी संपत्ति ली जानी है, इसमें भी कार्य नहीं दिख रहा है।

स्टेशन पुनर्विकास के भूमिपूजन की तारीख अभी तय नहीं स्टेशन पुनर्विकास के कार्य के भूमिपूजन की अभी तारीख तय नहीं है। जिस जगह पर रिहायसी आवास बने हैं, पहले वहां निर्माण शुरू किया जाएगा। भूमिपूजन के बाद निर्माण कार्य में गति दिखेगी।

हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य पीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे

Posted By: anil tomar

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