Gwalior Street light News: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में बिजली का खर्चा कम करने और आधुनिक तकनीक के जरिए एक ही डैशबोर्ड से संचालित होने का दावा कर लगाई गईं स्मार्ट एलईडी लाइटें लोगों की परेशानी का कारण बन रही हैं। इन लाइटों को ठीक करने के लिए नगर निगम की विद्युत शाखा को पर्याप्त उपकरण भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। यही कारण है कि शहर में प्रतिदिन औसतन 300 खराब स्ट्रीट लाइटों को ही ठीक कराया जा रहा है, लेकिन फिर भी ये समस्या दूर नहीं हो रही है क्योंकि उससे ज्यादा लाइटें खराब हो रही हैं।

स्मार्ट सिटी ने एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (इइएसएल) के माध्यम से 21 करोड़ रुपए की लागत से शहर में 62 हजार स्मार्ट एलईडी लाइटें लगवाई हैं। शुरूआत में दावा किया गया था कि इन सभी लाइटों को सेंट्रल कंट्रोल एंड मानिटरिंग सिस्टम (सीसीएमएस) सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। इसका यह लाभ होगा कि एक ही डैशबोर्ड पर सभी लाइटें नजर आने लगेंगी। जैसे ही कोई लाइट खराब होगी, तो डैशबोर्ड पर पता चल जाएगा और खराब लाइट को तुरंत सुधारा जा सकेगा। यह सिस्टम तो अभी लागू हो ही नहीं पाया है और उससे पहले ही शहर में लगाई गईं लाइटें खराब होने लगी हैं। यह समस्या गत जून माह से चल रही है। इसी बीच स्मार्ट सिटी ने नगर निगम को 25 करोड़ रुपए में सात साल तक इन लाइटों के संचालन एवं संधारण का जिम्मा सौंप दिया है, लेकिन उपकरणों की कमी के चलते निगम का विद्युत विभाग भी औसतन सिर्फ 300 लाइटें ही ठीक कर पा रहा है। पिछले दो माह से निगम ही इन लाइटों को सुधारने का जिम्मा उठा रहा है, लेकिन यह समस्या समाप्त नहीं हो रही है। इन लाइटों की गुणवत्ता जांचने के लिए इइएसएल ने एक विशेष टीम ग्वालियर भेजी थी। अब अधिकारी इस टीम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि लाइटों के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सके।

Posted By: anil tomar

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