स्वच्छता रैंकिंग.लैंडफिल साइट एक साल से बंद होने पर कचरे का नहीं हो पा रहा निष्पादन,

नाले बंद न होने पर नदियों में बह रहा सीवेज

Gwalior Swachh Survekshan 2021:ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर ने स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार पांचवीं बार देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि ग्वालियर दो पायदान खिसककर 15वें नंबर पर आ गया। इसका कारण है कि इंदौर प्रशासन ने सालभर स्वच्छता को अभियान मानकर काम किया। इंदौर के लोगों ने स्वच्छता को आदत बना लिया है। लोग अपने घरों से कचरा अलग-अलग देते हैं, प्रशासन ने नालों को बंद कर सीवेज में मिलाया, जिससे कान्ह और सरस्वती नदी, जो स्वर्णरेखा और मुरार नदी की तरह नाला थीं, वह स्वच्छ नदी में बदल गई हैं। कचरे के पहाड़ों को इंदौर ने साफ कर वहां पर हरियाली लहलहा दी। दूसरी ओर ग्वालियर है, यहां आज भी केदारपुर में करीब एक लाख टन कचरे का पहाड़ खड़ा है। स्वर्णरेखा और मुरार नदी में खुले में सीवेज बहता है, घरों से बिना अलग किए कचरा निकलता है। इसका कारण है कि हमारे यहां स्वच्छता को अभियान न मानकर बोझ की तरह लिया जा रहा है। भागीदारी करनी है इसलिए एक माह काम कर लिया, बाकी 11 महीने पुराने ढर्रे पर ही काम किया।

इंदौर में घरों से ही अलग-अलग कचरा डाला जा रहा पर यहां नहीं

गाड़ियों में नहीं है अलग-अलग रंग के डिब्बे: इंदौर में प्रत्येक वाहन में कचरे के लिए अलग-अलग रंग के डिब्बे हैं। ग्वालियर में टिपर वाहनों से कचरा कलेक्शन के लिए डिब्बे नहीं हैं। इसके कारण लोगों को भी घरों से अलग-अलग कचरा देने की आदत नहीं बनी। आज भी लोग अपने घरों का कचरा एक ही डस्टबिन में मिलाकर देते हैं।

प्रतिदिन गाड़ियों का नहीं पहुंचना: इंदौर में प्रतिदिन कचरा संग्रहण के लिए वाहन निकलते हैं और प्रत्येक घर से कचरे का संग्रहण किया जाता है, लेकिन ग्वालियर में प्रतिदिन वाहन नहीं आने से लोगों के घरों में कचरा चार से पांच दिनों तक भरा रहता है। ऐसे में लोगों को कचरे को घरों के बाहर फेंकना पड़ता है।

कचरे के ठीये: स्वच्छ सर्वेक्षण में कचरे के ठीयों को खत्म करना था, इंदौर ने कचरों के ठीयों को खत्म कर दिया, लेकिन हमारे यहां कचरे के ठीये आज भी हैं, साथ ही उनकी संख्या बढ़ रही है।

कचरे का रियूज नहीं होना: लैंडफिल साइट पर कचरे को कमाई का साधन बनाना था, कचरे से बिजली, खाद सहित आदि बनाया जाना था। साथ ही प्लास्टिक के कचरे को भी रियूज किया जाना था, लेकिन हमारे यहां पिछले एक साल से अधिक समय से लैंडफिल साइट बंद थी। इसके कारण कचरे का रियूज नहीं किया जा सका। वर्तमान में करीब एक लाख टन कचरे का पहाड़ लैंडफिल साइट पर खड़ा है। इंदौर में कचरे का रियूज किया जा रहा है। इंदौर में पहले ग्वालियर से ज्यादा कचरे के पहाड़ थे, लेकिन इसे खत्म कर वहां पर खेल के मैदान और पार्क बना दिए गए।

इंदौर ने नालों को बंद किया पर हमने नहीं

नदी-नालों में सीवेज बहना: स्वर्णरेखा और मुरार नदी में आज भी सीवेज बह रहा है। अमृत पार्ट-1 समाप्त होने की घोषणा हो चुकी है, लेकिन यह दोनों नदियां साफ नहीं हुईं, नालों को बंद नहीं किया गया। ग्वालियर में करीब 110 नाले हैं जो नदियों में गिरते हैं। दूसरी ओर इंदौर ने करीब 500 से ज्यादा नालों को बंद किया, प्रत्येक घर को सीवेज नेटवर्क से जोड़ा, जहां सीवेज लाइन नहीं जा सकती थी, वहां पर सोक पिट बनाई। नतीजा कान्ह और सरस्वती नदी दोनों साफ हो गईं।

शौचालय:- शहर में शौचालय सिर्फ स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान ही साफ किए जाते हैं, इसके बाद कई शौचालयों पर ताले तक डले हुए हैं, जबकि इंदौर में खुले में शौच एवं पेशाब करना बंद हो चुका है।

इधर प्रभारी मंत्री बोले- इंदौर से सीखेंगे, सफाई बनेगी जनआंदोलन

प्रिभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि सफाई में पिछड़ा ग्वालियर अब इंदौर से सीखेगा। ग्वालियर और इंदौर के अधिकारियों की संयुक्त बैठक इंदौर में जल्द होगी। सफाई को जनआंदोलन बनाना होगा जिसमें खुद प्रभारी मंत्री ने ग्वालियर के छात्र से लेकर हर नेता-हर वर्ग से खुद बात करने का दावा किया है। सफाई में ग्वालियर क्यों पिछड़ा खुद प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के पास कोई जवाब नहीं था, बस इतना बोल सके कि यह चिंताजनक है।

इस बार हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे और अच्छी रैंकिंग लेकर आएंगे, नवाचार भी किए जाएंगे। शहर से गोबर कलेक्ट करना प्रारंभ किया है। जल्द ही शहर में बदलाव नजर आएगा। कचरा सब स्टेशन चालू हो गए हैं, लैंडफिल साइट पर कचरा प्रोसेस होना प्रारंभ हो गया है। जल्द ही कचरे को फायदे का सौदा बनाया जाएगा। इसके लिए भी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई हैं। शहर साफ रहे इसके लिए कचरा प्रतिदिन उठाया जाएगा। साथ ही लोग अपने घरों से अलग-अलग कचरा दें, इसके लिए मुहिम चलाई जाएगी।

किशोर कान्याल नगर निगम आयुक्त

Posted By: anil.tomar

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