-स्वास्थ्य अधिकारी कराएंगे सेग्रीगेशन, उपायुक्त संभालेंगे सफाई मित्र सुरक्षा

-फिर वाटर प्लस और सेवन स्टार रेटिंग का दावा करेगा निगम

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में सिर्फ दो नालियों पर जालियां न लगी होना नगर निगम को भारी पड़ गया। गुरुवार को शहरी विकास मंत्रालय से निगम को मिली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महाराज बाड़ा क्षेत्र के आसपास दो नालियों पर ट्रैश अरेस्टर (जालियां) नहीं मिलने के कारण वाटर प्लस का दर्जा नहीं मिल पाया है। इससे निगम अधिकारी भी हैरत में हैं। हालांकि अब अधिकारियों ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की तैयारी शुरू कर दी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की परीक्षा अब 7500 के बजाय 9500 अंकों की होगी। सिटीजन फीडबैक की अवधि भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब निगम अधिकारियों ने स्वच्छ सर्वेक्षण की जिम्मेदारियां बांटने के लिए सूची तैयार कर ली है। पिछले सर्वेक्षण में तीन अंकों का नुकसान होने के बाद अब इस बार निगम का पूरा अमला इस कार्य में लगाया जाएगा।

इस बार होम कंपोस्टिंग यानी पार्कों व घरों में खाद बनाने की जिम्मेदारी संपत्तिकर वसूली करने वाले कर संग्रहकों (टीसी) को सौंपी गई है। ये टीसी ही सुनिश्चित करेंगे कि घरों में गीले कचरे से खाद तैयार हो। कचरा सेग्रीगेशन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी व विधानसभा वार स्वास्थ्य अधिकारी सुनिश्चित करेंगे, वहीं उपायुक्तों को सफाई मित्र सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम एक बार फिर से स्वच्छ सर्वेक्षण में वाटर प्लस और सेवन स्टार रेटिंग का दावा करने जा रहा है। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में सेवा आधारित प्रगति पर तीन हजार के बजाय 4525 अंक रखे गए हैं। इसमें कचरा सेग्रीगेशन और कलेक्शन के 1750 अंक, प्रसंस्करण व निपटान के 1830 अंक रखे गए हैं। वहीं संवहनीय स्वच्छता व सफाई मित्र सुरक्षा के 945 अंक होंगे। इसके अलावा सर्टिफिकेशन के 2500 अंक और सिटीजन फीडबैक के 2475 अंक होंगे। ऐसे में नगर निगम आयुक्त किशोर कान्याल ने अब प्रत्येक अंक की श्रेणी के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी है। इसमें कचरे के प्रसंस्करण एवं निपटान का नोडल अधिकारी पीएचई इंजीनियर महेंद्र अग्रवाल को बनाया गया है। इनके साथ रोहित तिवारी व अभिषेक झा सहयोग करेंगे। सिटीजन फीडबैक के लिए कंप्यूटराइजेशन शाखा सहित बैक आफिस के सभी कर्मचारियों को लगाया जाएगा। लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से निगम ने आइइसी एक्टिविटी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही दस्तावेज तैयार करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी को बतौर सलाहकार भी नियुक्त कर लिया गया है।

-जनप्रतिनिधियों की भूमिका अहम-

इस बार निगम के चुने गए जनप्रतिनिधियों जैसे महापौर, सभापति और पार्षदों की भूमिका अहम है, क्योंकि वार्डों में पार्षदों का हर घर में संपर्क है। इसके चलते इस बार निगम अधिकारी पार्षदों की भी मदद लेने जा रहे हैं। इस बार निगमायुक्त के अलावा महापौर के हस्ताक्षर के साथ ही सभी दस्तावेज भी शहरी विकास मंत्रालय को जमा किए जाएंगे। इस बार आइइसी एक्टिविटी में भी पार्षदों को साथ लिया जाएगा।

-40 वाहन बढ़ाए जाएंगे-

अभी शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 210 टिपर वाहन लगे हुए हैं। अब निगम 21 सीएनजी टिपर वाहन खरीदने के साथ ही डंपर व जेसीबी की संख्या भी बढ़ाने जा रहे हैं। कचरा कलेक्शन के लिए अब 40 वाहन और बढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा निगम के वाटर और सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों पर पीएचई के अधिकारियों को व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Posted By: anil tomar

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