Gwalior Traffic News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए तीन सबसे बड़ी चुनौती जिला प्रशासन के सामने हैं। पहला सड़क किनारे लगने वाले हाथ ठेले, दूसरा नो पार्किंग में खड़े होने वाले वाहन, तीसरा यात्री वाहनों के स्टापेज व्यवस्थित नहीं होना। संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने कलेक्टर व एसपी को हाथ ठेले वालों को हाकर्स जोन में शिफ्ट करने के लिए जनप्रतिनिधियों के बीच सहमति बनाने के लिए बैठक करने के निर्देश दिए थे। प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में केवल 10 हाकर्स जोन हैं, इनमें एक उजड़ चुका है। नौ हाकर्स जोन में केवल 867 ठेले वालों को शिफ्ट करने की व्यवस्था है। जबकि नगर निगम में 26 हजार के लगभग हाथ ठेले रजिस्टर्ड हैं। एेसे में अहम सवाल है कि शेष 25 हजार हाथ ठेले कहां जाएंगे। हाथ ठेलों के हाकर्स जोन में शिफ्ट नहीं होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण नेतागिरी है। नेतागिरी के कारण हाथ ठेले अपनी इच्छा के अनुसार सड़कों पर जमे हुए हैं, और अनुमान के अनुसार शहर में जाम से प्रतिदिन दो लाख से अधिक लोग परेशान होते हैं।

पिछले दो दशकों में शहर का विस्तार हुआ है, लेकिन यह विस्तार केवल एक साइड हुआ है। शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जिसके कारण शहर की सड़कों पर सुबह से लेकर रात तक जाम सबसे बड़ी समस्या बन गया है। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस के पास दूरगामी योजना नहीं है। संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना व आइजी अविनाश शर्मा ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह व एसपी अमित सांघी सहित जिले के अन्य अधिकारियों के साथ शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए समस्याओं को चिन्हित किया है।

इन पर हुआ अमल

1-वीडियो कोच बस स्टैंड को झांसी रोड पर शिफ्ट कर दिया गया है। अभी यहां जनसुविधाओं का अभाव है।

2- भिंड-मुरैना के मध्य संचालित होने वाली बसों को गोला का मंदिर पर जेबी मंघाराम फैक्ट्री के सामने खाली पड़े मैदान में शिफ्ट किया गया है।

3- माधवनगर व चेतकपुरी के गेट के डिवाइडर को बढ़ा दिया गया हैं।

हाथ ठेले वालों को शिफ्ट करने की दिशा में कोई पहल नहीं: संभागीय आयुक्त व आइजी अविनाश शर्मा ने कलेक्टर व एसपी को निर्देशित किया था कि शहर के प्रमुख मार्गों पर लगने वाले हाथ ठेले वालों को हाकर्स जोन में शिफ्ट किया जाए। अधिकारियों ने लक्ष्मण तलैया पर स्थित हाकर्स जोन का निरीक्षण भी किया था। इसके लिए जिले के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर सहमति बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पाई है। इस संबंध में एसपी अमित सांघी का कहना है कि जल्द इस संबंध में कलेक्टर व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर हाथ ठेले वालों को हाकर्स जोन में शिफ्ट करने का रास्ता निकाला जाएगा। इससे पहले तत्कालीन ग्वालियर पूर्व के विधायक मुन्नालाल गोयल के प्रयासों से मुरार के हाथ ठेले हाकर्स जोन में शिफ्ट किए थे, लेकिन अब वापस हाथ ठेले सड़क पर आ गए हैं।

यह है हाकर्स जोन की स्थिति

1- नेहरू पार्क के पास कंपू (प्रथम)-क्षमता 160 हाथ ठेले

2- नेहरू पार्क के पास (द्वितीय) -120

3- एसएएफ पेट्रोल पंप के पास (महिलाओं के लिए)-90

4- गोल पहाड़िया नेहरू पेट्रोल पंप के आगे-102

5- पिंटो पार्क तिराहा-145

6- लक्ष्मण तलैया के नीचे रामदास घाटी-100

7- इंटक मैदान हजीरा-100

8- मछली मंडी के पास गरम सड़क-25

9 सिंहपुर रोड घासमंडी-25

10- उरवाई गेट (बसने से पहले ही उजड़ गया)

(नगर निगम रजिस्टर्ड हाथ ठेलों की संख्या 26 हजार)

ठेले शहर की लाइफ लाइन हैंः सबसे अधिक जाम की स्थिति ग्वालियर पूर्व व दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के मार्गों पर रहती है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस विधायक हैं। ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक डा. सतीश सिकरवार का कहना है कि ठेले वाले शहर की लाइफ लाइन हैं। गरीबों के पेट ठेले पर सामान बेचकर ही भरता है। कोरोना संक्रमण काल के कारण कई नौकरीपेशा भी ठेले लगाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दिल्ली व मुंबई जैसे शहरों में ठेले सड़कों पर लगते हैं। इनकी रोजी-रोटी छीनने के पक्ष में वह कतई नहीं हैं। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन को व्यापक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। केवल ठेले हटाकर शहर जाम से मुक्त नहीं होगा।

Posted By: vikash.pandey

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