Gwalior Urban Bodies Election 2022: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। इस बार नगर के 66 वार्डों में सीधा मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच होगा। आप पार्टी व बसपा भी अपनी उपस्थिति नगरीय निकाय चुनाव में दर्ज कराने के लिए चुनावी रण में पूरी दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव अपने पार्षदी के लिए भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। पार्टी का अधिकृत चुनाव चिन्ह पार्टी उम्मीदवार को आवंटित कराने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी बी फार्म भी देगी। कांग्रेस के इस फैसले से नगरीय निकाय चुनाव फ्री आल लड़ने की चर्चाओं पर विराम लग गया है।

तीन दशक से है नगर सरकार पर कब्जा: तीन दशक से नगर सरकार पर भाजपा का कब्जा है। नगर को भाजपा का अभेद किला माना जाता है। एक बार फिर कांग्रेस के पास भाजपा के किले के भेदने का मौका है, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस कमजोर हुई है। पार्टी के कमजोर होने की बात को कांग्रेसी नकारते हैं। उनका सवाल है कि सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस की नगर सरकार क्यो नही बनीं। इस बार महल से मुक्त कांग्रेस मैदान में हैं। इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आयेंगें। दूसरी तरफ भाजपा नेताओं का दावा है कि अब कांग्रेस नेतृत्व विहीन है। इसलिए मुकाबले की स्थिति में नही हैं।

पंजा चुनाव-चिन्ह पर लड़ेंगे: प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अशोक सिंह का कहना है कि कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी और कांग्रेस उम्मीदवार पंजा चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव लड़ेंगे। फ्री आल पर चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं उठता है। यह तो विरोधियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा था।

आप भी मैदान में होगी: पंजाब चुनाव से आत्मविश्वास से लबरेज आप पार्टी भी वार्डों से अपनी जड़े मजबूत करने के लिये मैदान में उतरेगी। अभी यह आप का यह तय नहीं कि 66 वार्डों में कितने वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारेगी। बसपा भी पूर्व के भांति जोर मारेगी। हालांकि उत्तर प्रदेश के चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रदेश सहित अन्य राज्यों में कमजोर हुई है।

केवल 1994 में कांग्रेस बगैर पंजे के चुनाव लड़ी थीः शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष डा. देवेंद्र शर्मा का कहना है कि कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव बगैर चुनाव चिन्ह के केवल सन 1994 में लड़ी थी। उस समय कांग्रेस ने सभी दावेदारों को चुनाव लड़ने के लिये फ्री कर दिया था। किसी को चुनाव-चिन्ह आवंटित नहीं किया था। उस समय भी कांग्रेस विचारधार से उम्मीदवारों ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अपने होडिंग्स व बैनर पर अंकित किया था। इस बार पूरी ताकत के साथ कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में मैदान में उतरेगी।

Posted By: vikash.pandey

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