Gwalior weekly Column Veer Bol : वीरेंद्र तिवारी, ग्वालियर। मैं किसी भी धर्म के संतों के बारे में बहुत जल्दी राय नहीं बनाता, न गलत न सही। मेरा मानना है कि हर उस व्यक्ति जिस पर लाखों लोग आंख बंद करके विश्वास कर रहे हैं उसकी पहरेदारी होना ही चाहिए, फिर चाहे वह सनातन धर्म के प्रचारक हों या मुस्लिम, सिख, ईसाई या जैन संत। क्या है कि जो व्यक्ति पूरे विश्व समाज का तानाबाना बना सकते हैं या बिगाड़ सकते हैं उन्हें अपनी शक्ति और जिम्मेदारी का अहसास भी तभी होगा जब कुछ असहमत लोग उनसे वह सारे सवाल करेंगे जो उनके भक्त नहीं कर पाते हैं। सवाल खड़ा करने वाले लोग जय-जयकार करने वाले करोड़ों लोगों के दुश्मन नहीं बल्कि उनकी श्रद्धा के पहरेदार हैं। सोने को सुनार जब आंच में तपाता है तो तभी वह अपने अंदर व्याप्त अशुद्धियों को बाहर फेंककर अधिक शुद्ध और चमकदार हो जाता है। अग्नि परीक्षा से गुजरकर जिन दिव्य धर्म प्रचारकों का निर्माण होगा वह न सिर्फ अच्छी विश्व बिरादरी का निर्माण करेंगे बल्कि उन लोगों पर आंख बंद करके भरोसा भी किया जा सकेगा।

जनसुनवाई में कृपया पेट्रोल साथ लेकर जाएं!

प्रदेश के हर सरकारी दफ्तर में प्रति मंगलवार जनसुनवाई की 'रश्मअदायगी' होती है। उसमें वही सब बैठते हैं जिनके दफ्तर में पीड़ित कई बार पहुंचकर थक चुका होता है। बस नया यह है कि विभाग के मुखिया भी इसमें मौजूद होते हैं तो लोगों को थोड़ी उम्मीद रहती है कि सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने की जो अघोषित सजा उसे मिल रही है उससे बरी हो जाए। हालांकि इन सुनवाइयों में सुनवाई करवाने के लिए भी पीड़ित मयपरिवार पेट्रोल लेकर जा रहे हैं। पिछले समय में ऐसे घटनाक्रम आए जब जनसुनवाई में आत्मदाह की कोशिश हुई तब जाकर बड़े अधिकारियों को विश्वास हुआ कि हां, यह बंदा सचमुच परेशान होगा तभी तो जान देने पर तुला है। आश्चर्य की बात है कि उनकी उसी समस्या का तुरंत समाधान भी हो जाता है जो अभी तक अधिकारियों की नजर में नियम विरुद्ध थी। कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी सहित उन तमाम मुखियाओं को सोचना होगा कि आपके निचले स्तर पर सचमुच यदि ईमानदारी से काम हो रहा होता तो जनसुनवाई के कक्ष भी खाली होते और सुनवाई के लिए किसी को पेट्रोल स्नान भी नहीं करने होते।

उमाजी के बाण-कभी शराब कभी रेत

प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती के तरकश में ऐसे तीर हैं जो प्रदेश सरकार के साथ साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को असहज करते रहते हैं। शराबबंदी की घोषणा के बाद उमाभारती अघोषित तौर से शिवराज सरकार से टकरा रही थीं। जैसे तैसे मामले को सबने मिलकर ठंडा किया। अब उमाजी ने नया तीर छोड़ा है अवैध रेत उत्खनन का। चंबल नदी से अवैध तौर से जमकर रेत निकाली जाती है, यह अकाट्य सत्य है। लेकिन उमाभारती ने हाल ही में ट्वीट किया जिसका लब्बोलुआब यह था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी चंबल में रेतमाफिया की अराजकता और समानांतर सत्ता चल रही है आप कुछ करते क्यों नहीं। हालांकि उमाभारती के इस ट्वीट को न कांग्रेस मुद्दा बना सकी न ही भाजपा में कोई हलचल हुई, होगी भी नहीं। सभी जानते हैं कि चंबल से रेत का एक कण नहीं निकल पाए यदि पक्ष-विपक्ष के लोग अपनी उन बेनामी फर्मों को बंद कर दें, जिसे हम रेतमाफिया कहते हैं।

क्या ग्वालियर को महागांव बनाकर रहेगा?

आज भले ही हम ऐतिहासिक इमारतों पर फसाड लाइटिंग करके खुद को स्मार्ट सिटी के झूठे तमगे से नवाजते हों लेकिन हम कितने स्मार्ट हुए यह हम सभी को बेहतर पता है। खैर। आज से 50 साल बाद ग्वालियर कैसा होगा ? आज हम जितने भी स्मार्ट हुए हैं वह सारे प्रोजेक्ट तो आउटडेटेड हो जाएंगे। उस वक्त हमारे पास क्या होगा बताने के लिए। शायद कुछ नहीं क्योंकि हम जाग ही नहीं रहे हैं। हालही में हमारे हाथ से जो केंद्र की ग्रीनफील्ड सिटी योजना छिन रही है वह कोई छोटी योजना नहीं है। इससे भविष्य में मौजूद महानगरों के पास नये औद्योगिक शहरों को बसाना भी है, जहां पर्याप्त मात्रा में रोजगार हों वह भी थीम आधारित। लेकिन ग्वालियर की जगह इंदौर के पास पीथमपुर और जबलपुर का नाम राज्य सरकार ने भेजा है। भविष्य में यह महानगर ग्रीनफील्ड कहलाएंगे और हम महागांव।

Posted By: anil tomar

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