- वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे: वन्य संपदा को संरक्षण देने वन विभाग तैयार करा रहा तालाब

Gwalior Wild life Day News: चेतना राठौर. ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सघन जंगलों में झूमता वन्य जीवन ईको सिस्टम को मजबूत रखने में मददगार है। जिसकी खोज में कई बार वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर अपने घरों से निकले। कई घंटों के इंतजार के बाद वे अपने कैमरों में हिरण, घड़ियाल, डाल्फिन, स्याह गोश और उदय आटर मेवल को ही कैद कर पाए, जबकि ग्वालियर का छह हजार सात सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल वन के रूप में फैला हुआ है। श्ोर, तेंदुआ और बाघ की मौजूदगी नहीं है। हालांकि यह क्षेत्रफल ईको सिस्टम को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहा है। चंबल नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल और छह प्रजाति के कछुआ पूरी दुनिया में कहीं नहीं हैं। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे की पूर्व संध्या पर शोधार्थी रामकुमार लोधी कहते हैं चंबल के कछुआ पानी को साफ रखते हैं। कुछ दिनों पहले छह प्रजाति के कछुओं को तेजी से प्रदूषित हो रही गंगा नदी में छोड़ा गया था। इसके अलावा एबीवी ट्रिपल आइटीएम और जीवाजी विश्वविद्यालय के कुछ क्षेत्र को रिजर्व एरिया घोषित कर दिया गया है। यहां इंसानों के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, क्योंकि इस क्षेत्र में सांप, बिच्छू के साथ और भी खतरनाक वन्य प्राणियों की मौजूदगी है। रिजर्व एरिया बनाने का मुख्य उद्देश्य वन्य प्राणियों के हैबिटेट को सुरक्षित रखना तय किया गया है। वहीं वन विभाग के डीएफओ अभिनव पल्लव का कहना है वन्य संपदा को सुरक्षा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ग्वालियर के अलावा इसके दायरे में आने वाले अन्य क्षेत्रों चार क्षेत्रों को चि-त कर हैबिटेट किया जा रहा है। जिससे वन्य संपदा को इंसान से कोई खतरा न हो। उनके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में पानी के तालाब बनवाए जा रहे हैं।

2020 में हुई घड़ियालों की संख्या में वृद्धि

विशेषज्ञों का कहना है पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा घड़ियाल चंबल नदी में ही पाए जाते हैं। इनकी मौजूदगी बनी रहे और संख्या में वृद्धि हो, इसके लिए वन विभाग लगातार प्रयासरत है। नदी के पास रेडियो ट्रैकिंग डिवाइस लगाई गई है, जिसमें घड़ियालों की हर गतिविधि कैद होती है। डिवाइस बताती है, ये घड़ियाल एक दिन में कितनी बार पानी से बाहर आते हैं और कितने समय तक ठहरते हैं। इतना ही नहीं यह भी पता चलता है पानी से ये कितने घंटे बाहर रुकना पसंद करते हैं। डिवाइस के अनुसार 2020 में चंबल नदी की शान 350 घड़ियालों ने और बढ़ाई। चंबल की सहायक नदी केन में भी डिवाइस से पता चला कि घडियाल इस नदी पर भी अपना ढेरा जमा रहे हैं। इस खुशखबरी के बाद वन विभाग हरकत में आया और उसने नदी में तीन से चार साल तक के कई घड़ियालों को छोड़ा।

जहां पानी होता है, वहां ठहरते हैं

वन विभाग के डीएफओ पल्लव के अनुसार वन्य जीव वहां अपना डेरा डालते हैं, जहां पर उन्हें पानी सुगमता से मिल जाता है। इसी बात को ध्यान में रखकर विभाग ने तालाब खोदने की योजना तैयार की। जब तालाब खुद जाएंगे तो वहां इंसानों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। उन्होंने बताया पहने चरण में ओहदपुर, तपोवन और अजयपुर में तलाबों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

Posted By: anil.tomar

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