Gwalior Zoo News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। चिड़ि़याघर को बड़ा बनाने के लिए स्मार्ट सिटी ने गुड़़ा-गुढ़़ी का नाका पर 125 हेक्टेयर जमीन देखी है। इस जमीन को चिड़ियाघर को देने के लिए डीएफओ ने प्रस्ताव बनाकर भोपाल मुख्यालय भेज दिया है। इस जगह पर जानवरों को रखने के लिए बड़े केज के साथ अब नगर निगम गिद्धाें के प्रजनन एवं रेस्क्यू सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है । इसके लिए नगर निगम आयुक्त जू अथॉरिटी व वन विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। नगर निगम द्वारा संचालित चिड़ि़याघर में गिद्धाें के प्रजनन एवं रेसक्यू सेंटर बन जाने के बाद संभवत: यह भारत का पहला ऐसा रेस्क्यू एवं प्रजनन केंद्र होगा, जिसका संचालन नगर निगम करेगा। वहीं गांधी प्राणी उद्यान में सफलतापूर्वक गिद्धाें का प्रजनन कराया जा चुका है। साथ ही यहां जो बच्चे का जन्म हुआ था वह स्वस्थ भी है। गिद्धाें को विलुप्त प्रजाति में शामिल किया गया है, साथ ही इनके बचाव के लिए केंद्र सरकार सहित प्रदेश सरकार भी प्रयासरत है। गिद्धाें को प्राकृतिक रूप से सफाईकर्मी माना जाता है, जो कि सभी जानवरों के अवशेषों को खाकर जिंदा रहता है। प्रकृति को संतुलित रखने में गिद्धाें की बहुत बड़ी भूमिका रहती है, लेकिन वर्तमान समय में पशुओं की बीमरियों को ठीक करने के लिए दिए गए इंजेक्शनों के कारण गिद्धाें की संख्या काफी कम हो गई है। वर्तमान समय में ग्वालियर किले, नलकेश्वर एवं तिघरा की पहाड़ि़यों पर गिद्ध मिलते हैं।

गर्मियों में हर साल घायल होकर आते हैं कई गिद्धः किला पर रहने वाले गिद्ध गर्मियों के मौसम में पानी की कमी के कारण डिहाइड्रेट होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। ऐसे में शहरवासी इन गिद्धाें को चिड़ि़याघर लेकर आते हैं, जहां इनका उपचार कर इन्हें छोड़ दिया जाता है। हालांकि इस साल बहुत अधिक गर्मी नहीं पड़ी, लेकिन इसके बाद भी एक गिद्ध को रेस्क्यू कर चिड़ि़याघर में लाया गया था।

चिड़ि़याघर में साल 2016 में दिया था गिद्ध ने अंडा, लेकिन फूट गयाः नगर निगम द्वारा संचालित चिड़ि़याघर में गिद्धाें के प्रजनन करने का संभवत: पहला मामला ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान में हुआ था। 2016 में पहली बार एक गिद्ध ने अंडा दिया था, लेकिन उचित देखरेख के अभाव एवं गिद्धाें की आपसी लड़ाई में वह फूट गया था। इसके बाद दूसरी साल 2017 में गिद्ध ने फिर एक अंडा दिया, इसकी चिड़ि़याघर प्रबंधन ने उचित देखभाल की, जिसके बाद इससे बच्चे का प्रजनन हुआ था।

वर्जन-

चिड़ि़याघर में गिद्धाें का प्रजनन एवं रेसक्यू सेंटर बनाए जाने को लेकर विचार चल रहा है, जल्द ही इसकी कागजी कार्रवाई भी करेंगे। गिद्ध प्रकृति का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है, इसे बचाकर हम प्रकृति को संतुलित रखने में अपना योगदान दे सकते हैं।

शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त

Posted By: vikash.pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags