ग्वालियर,(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर में आम जनता के चलने के लिए भले ही सड़कें नहीं बची हों, लेकिन बरसात के बावजूद शहर की वीआइपी सड़कें अब भी चकाचक हैं। ये वो सड़कें हैं जहां शहर के आइएएस, आइपीएस अधिकारियों सहित नेता-मंत्री निवास करते हैं। अधिकारी प्रयास करते हैं कि लक्जरी गाड़ियों में बैठकर निकलने वाले इन वीआइपी लोगों के पेट का पानी भी न हिले, फिर भले ही आम लोगों की चूलें गड्ढों भरी सड़क पर सफर करते हुए हिल जाएं। हालांकि नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शहर में जनता के लिए भी सड़कों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन वीआइपी सड़कों पर गड्ढे क्यों नहीं होते, इसका जवाब उनके पास नहीं है।

शहर की गांधी रोड, रेसकोर्स रोड, सात नंबर चौराहा ऐसे मार्ग हैं जहां अधिकतर वीआइपी निवास करते हैं। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों सहित केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्री व सांसद निवास करते हैं। नईदुनिया प्रतिनिधि ने बुधवार को इन सड़कों का जायजा लिया, तो देखा कि इन सड़कों में सबसे दुरुस्त स्थिति गांधी रोड की है। यहां संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीनिवास वर्मा, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक अमित सांघी सहित जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के बंगले हैं। इस सड़क पर दोनों तरफ एक-दो गड्ढे ही नजर आते हैं। पूरी वर्षा बीतने के बाद भी यह रोड टिकी हुई है, जबकि यहां पूरे दिन कार, आटो, टैंपो सहित लोडिंग वाहन और दोपहिया वाहन गुजरते रहते हैं। ठीक इसी प्रकार रेसकोर्स रोड पर भी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारियों के बंगले हैं। स्टेशन से गोला का मंदिर जाते समय इस सड़क पर गड्ढे हैं, लेकिन जिस तरफ बंगले बने हुए हैं वहां की रोड पर गड्ढे नजर नहीं आते हैं।

गडकरी आए तो वर्षा के बावजूद बिछाई सड़कः नगर निगम के ज्यादा अधिकारी यह बहाना बनाते हैं कि वर्षा के दौरान सड़क नहीं बनाई जाती है, क्योंकि डामर और गिट्टी ठीक से नहीं मिल पाते हैं। दूसरी ओर इसी माह 15 तारीख को एलिवेटेड रोड और इंटर स्टेट बस टर्मिनल का शिलान्यास सहित अन्य सड़कों के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ग्वालियर आए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के कार्यक्रम के लिए भरी बरसात में प्रशासन और निगम अधिकारियों ने गोला का मंदिर से लेकर ट्रिपल आइटीएम तक सड़क का निर्माण करा दिया। वैसे उसके बाद भी वर्षा हुई, लेकिन यह सड़क अब भी टिकी हुई है। ऐसे में सवाल यह खड़े होते हैं कि आम जनता के लिए ही वर्षा के बहाने क्यों बनाए जाते हैं।

इंटरनेट मीडिया पर फूटा गुस्साः नईदुनिया ने बुधवार के अंक में ‘गड्ढों में ग्वालियर’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था। इंटरनेट मीडिया पर इस खबर पर कमेंट करते हुए कई लोगों ने निगम अफसरों और सड़कों के गड्ढों पर गुस्सा जताया। एक यूजर अतुल जैन ने लिखा-‘ग्वालियर की सड़कों की हालत बहुत बदतर हो चुकी है।’ निशिकांत मोघे ने कमेंट किया-‘एक ट्रैक्टर-ट्राली वाला ग्वालियर की सड़कों के विषय में बोला कि यहां भी ट्रैक्टर चलाने में सेम गांव की फीलिंग आती है।’ इसी तरह एक यूजर अजीत धनेलिया ने प्रतिक्रिया दी-गड्ढे में एक भी सड़क हो तो बताओ। गर्व हैं कि हम गड्ढों में रहते हैं।

अधीक्षण यंत्री के घर पर सड़क ठीक, 10 मीटर आगे गड्ढेः नगर निगम में इन सड़कों को सुधारने की जिम्मेदारी अधीक्षण यंत्री जेपी पारा पर है। इनका निवास दीनदयाल नगर में है। इनके घर तक पहुंचने वाली और निवास के आसपास सड़क बिल्कुल दुरुस्त है, लेकिन ठीक 10 मीटर आगे सड़क बनी ही नहीं है। क्षेत्रीय निवासी कई बार मांग कर चुके हैं कि उनके घरों के आगे भी सड़क बनाई जाए, लेकिन निगम की कृपा सिर्फ अधीक्षण यंत्री के घर तक जाकर ही रुक गई है।

ये हैं जिम्मेदारः जेपी पारा, अधीक्षण यंत्री नगर निगम

वर्जन-

खराब सड़कों की पेंच रिपेयरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं और बुधवार से प्लांट चालू कर दिया गया है। सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है, साथ ही डामरीकरण कार्य भी जल्द शुरू कराया जाएगा। पूरे अक्टूबर माह में सड़कों को सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा गारंटी पीरियड वाली सड़कों के ठेकेदारों को भी सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।

किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम

Posted By: vikash.pandey

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