-दो साल से ज्यादा समय से फास्टर केयर में नौ बेटियों को संभाल रहीं थीं ज्योति चौहान

-बाल कल्याण समिति ने कहा लिखित दिया नहीं रखना,सरंक्षक ने कहा-सपोर्ट नहीं किया

ग्वालियर,(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बेसहारा नौ बेटियों को संभालने पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जिन सरंक्षक महिला को सराहा था,उनसे ही अब बेटियां वापस ले ली गईं। ज्योति सिंह चौहान फास्टर केयर में नौ बेटियों की देखरेख कर रहीं थीं,जो अब दूसरी संस्था को देने के लिए बाल कल्याण समिति ने आर्डर कर दिए। समिति के अनुसार सरंक्षक ने लिखकर दिया था कि वह देखरेख नहीं करना चाहतीं है, इसलिए ऐसा किया। सरंक्षक ज्योति सिंह का कहना है कि समिति की ओर से सहयोग न मिलने के कारण एक बार लिखकर दिया, लेकिन दोबारा गलती मान बेटियों को रखने का लिखित दे दिया था। दो साल से ज्यादा से बेटियों को रख रहीं थीं। अलग होने के बाद बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है,एक की तबीयत खराब होने के दौरान भी शिफ्ट कराया गया,वह अस्पताल में भर्ती है।

यहां यह बता दें कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 19 जुलाई 2021 को फास्टर केयर के सरंक्षकों से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बात की थी। इसमें ग्वालियर में फास्टर केयर संरक्षक विभा अनेजा और ज्योति सिंह चौहान से बात की थी और सराहना भी की थी। ज्योति सिंह चौहान ने संस्थागत तौर पर चार बेटियां और व्यक्तिगत तौर पर पांच बेसहारा बेटियों को फास्टर केयर के लिए लिया। बेटियों के लिए अलग से किराए का मकान लेकर उनके रखने की व्यवस्था भी की। दो साल से ज्यादा समय से वह बेटियों की देखरेख कर रहीं थीं। चार बेटियों का एडमिशन हस्तिनापुर स्थित कस्तूरबा बोर्डिंग विद्यालय में भी कराया जहां वे पढ़ रहीं हैं। ज्योति के अनुसार संस्थागत तौर पर रह रही बालिकाओं को लेकर समिति की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था और बार-बार निरीक्षण के दौरान समस्याएं बताईं जा रहीं थीं,इसी कारण उन्होने एक बार बेटियों को न रखने का पत्र दे दिया लेकिन इसके बाद तत्काल गलती सुधार कर वापस रखने का लिखित में दिया। यह बालिकाएं छह से 17 साल की उम्र के बीच हैं। इन्हें अब दूसरी संस्था मिनी गोल्डन सोसायटी को दिया गया है।

एक बच्ची दिल की मरीज,एक अस्पताल में भर्तीः एक छोटी बच्ची दिल की मरीज है, जिसकी तबीयत सही नहीं रहती है। एक 17 साल की बच्ची की बुधवार को तबीयत बिगड़ गई और वह अस्पताल में भर्ती है। जिला अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उसकी देखरेख के लिए भी कोई नहीं था।

वर्जन-

मुझे सहयोग नहीं दिया जा रहा था व परेशान करने के कारण नाराजगी में लिखकर दिया था कि बालिकाएं नहीं रखनीं, लेकिन फौरन दोबारा लिखित में दिया कि बेटियां रखना चाहतीं है। सभी 9 बालिकाओं को वापस लेकर दूसरी संस्था को द्वेषवश दे दिया गया ,यह गलत है।

ज्योति सिंह चौहान,सरंक्षक

वर्जन-

ज्योति सिंह ने लिखकर दिया था कि वह बेटियों को नहीं रखना चाहतीं है, ऐसे में हम बालिकाओं का हित सबसे पहले देखते हैं। नियमों के अनुसार बालिकाओं को वापस लेने का आदेश जारी किया गया है।

संदीपा मल्होत्रा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति

Posted By: vikash.pandey

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