Health News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना का दुष्प्रभाव अब दिखाई दे रहा है। कोविड में उपचार दौरान अधिक स्टेरायड के प्रयोग ने हड्डी संबंधी परेशानियां बढ़ाई। पिछले एक साल में हड्डी के आपरेशन 4 गुना बढ़े हैं। जहां पहले हर माह 300 लोग हड्डी का आपरेशन कराते थे अब यह संख्या 1200 हो चुकी है। यह बात देश के जाने माने आर्थोपेडिक सर्जन और शैल्बी ग्रुप आफ हास्पिटल के सीएमडी डा विक्रम शाह ने कही। उनका कहना था कि स्टेरायड के अधिक प्रयोग से हड्डी गलती हैं, यह समस्या युवाओं में तेजी से बढ़ी है। डाक्टर शाह ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी आने वाले समय में डाक्टरों के लिए चुनौती है इसलिए जरुरी है कि डाक्टर खुद को अपडेट करें। हालांकि रोबोट में सेंस नहीं होता डेटा पर काम करता है। इसलिए हर प्रकार की सर्जरी नहीं कर सकता,खासकर ज्वाइंड रिप्लेसमेंट तो बिल्कुल भी नहीं। डा विक्रम शाह शनिवार को शैल्बी आर्थोपेडिक सेंटर आफ एक्सीलेंस की नई शाखा के शुभारंभ अवसर पर कैलाश हास्पिटल पहुंचे थे।

सीधी बात: डा. विक्रम शाह, मुख्य सर्जन

सवाल : ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सभी शहरों में होती है, शैल्बी में ऐसा क्या है जो मरीज यहां उपचार लेगा?

जवाब : शैल्बी के आर्थोपेडिकल सर्जन द्वारा की गई सर्जरी के परिणाम अभी तक शत-प्रतिशत सफल हुए हैं। ज्वाइंट रिप्लेसमेंट करने में 15 मिनट का समय लगता। सर्जरी में कम समय लगने से संक्रमण का खतरा नहीं रहता। खून नहीं निकलता, विशेषज्ञ डाक्टर व स्टाफ द्वारा मरीज की देखरेख की जाती है तथा नियमों का पालन किया जाता है।

सवाल : रोबोटिक पद्धति से सफलतापूर्वक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट कराए जा सकते हैं, फिर डाक्टर से चीरा लगवाने की क्या आवश्यकता?

जवाब : ज्वाइंट रिप्लेसमेंट में रोबोटिक सर्जरी कारगार नहीं है, क्योंकि जो काम 15 मिनट में हो सकता है वह रोबोटिक सर्जरी में तीन घंटे में होता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल : स्टेरायड के अधिक उपयोग से क्या हड्डी गल जाती है, कोरोना काल के बाद क्या अंतर मिला?

जवाब : स्टेरायड के अधिक उपयोग से हड्डी गलने संबंधी परेशानी होती है। यह समस्या युवाओं में अधिक देखी जाती है। कोरोनाकाल के बाद चार गुना सर्जरी बढ़ी हैं।

सवाल : दिल्ली के आर्थोपेडिक सर्जन कम खर्च में आपरेशन करते हैं, शैल्बी में मरीज के लिए क्या सुविधा होगी?

जबाव : जब हम गुणवत्ता की बात करते हैं तो वहां पैसों की बात ठीक नहीं। फिर भी बता दूं कि शैल्बी में आयुष्मान योजना व इंश्योरेंस के माध्यम से उपचार की सुविधा है। शैल्बी का ट्रस्ट भी है जो उपचार दिलाने में आर्थिक मदद करता है।

प्रबंधन संभालेगा, जबकि उपचार संबंधी पूरा काम शैल्बी की यूनिट करेगी।

शनिवार को शैल्बी आर्थोपेडिकल सेंटर आफ एक्सीलेंस की नई शाखा ईदगाह कंपू पर स्थित कैलाश हास्पिटल में शुरू हो गई। जहां पर शैल्बी ग्रुप के विशेषज्ञ डाक्टर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट,स्पइनल कोड के आपरेशन करेंगे। जिससे ग्वालियर चंबल अंचल के मरीजों को अहमदाबाद नहीं जाना पड़ेगा और अब शैल्बी हास्पिटल की स्वास्थ्य सुविधा उन्हें उनके शहर में मिल सकेंगी।

देश में 11 शाखाएं संचालित

शैल्बी ग्रुप आफ हास्पिटल की देश में 11 शाखाएं संचालित हैं। डा. शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर में शैल्बी आर्थोपेडिक सेंटर आफ एक्सीलेंस की शाखा संचालित की जा रही हैं। ग्वालियर में शैल्बी के डा. संजय गोयल और उनकी टीम मरीजों को उपचार देगी। उनकी मदद के लिए इंदौर से डा. तोफीक पंजवानी, जबलपुर से डा. विकास सावला व दिल्ली से डाक्टर आएंगे।

Posted By: Prashant Pandey

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