ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगल पीठ में सोमवार को सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा विवाद पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने संभागायुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी को रिपोर्ट पेश करने दो महीने का समय दिया है, लेकिन क्षत्रिय महासभा ने नई जनहित याचिका दायर कर प्रतिमा को हटाने की मांग की है। तर्क दिया है कि प्रतिमा ही गलत लगी है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार शासन को सार्वजनिक स्थान पर मूर्ति लगाने अधिकार नहीं है। सम्राट महिर भोज की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव वर्ष 2015 में लगाया था। प्रस्ताव में सम्राट मिहिर भोज के सामने गुर्जर नहीं लिखा था। जिस अधिकारी ने इसे लगाया है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रतिमा को हटाया जाए। कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के बाद शासन को नोटिस जारी कर दिए। 24 जनवरी को याचिका की सुनवाई संभावित है।

राहुल साहू व क्षत्रिय महासभा की जनहित याचिका की एक साथ सुनवाई की जाएगी। क्षत्रिय महासभा के अधिवक्ता आरबीएस तोमर ने तर्क दिया है कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया था। इस आदेश में निर्देशित किया था कि किसी भी सार्वजनिक जगह पर प्रतिमा नहीं लगाई जाएगी। इस कारण सड़क व चौराहे पर प्रतिमा नहीं लगाई जा सकती। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी हाई कोर्ट को दी गई थी, इसलिए प्रतिमा को हटाया जाए। क्षत्रिय महासभा ने शासन, नगर निगम, निगमायुक्त किशोर कान्याल, एमआइसी, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक को प्रतिवादी बनाया है।

कमेटी नहीं पेश कर सकी रिपोर्टः राहुल साहू ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर उपजे विवाद को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दो समाजों के बीच प्रतिमा को लेकर विवाद हो रहा है। इससे शहर में ला एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ रही है। इसके बाद कोर्ट ने 29 सितंबर को एक अंतरिम आदेश दिया था। संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया। यह कमेटी सम्राट मिहिर भोज के संबंध में मौजूद शिलालेखों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। कोर्ट ने कमेटी के सामने हर पक्ष को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कमेटी को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ सकी। गुर्जर समाज की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एसएलपी दायर कर दी है।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close