ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। मानव शरीर जब हवा, मिट्टी और पानी के संपर्क में आने पर भारी धातु को ग्रहण कर सकता है। पर्यावरण में मौजूद कुछ आम हैवी मेटल्स में आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, पारा, क्रोमियम, निकल, मैंगनीज शामिल हैं। ये हमारे शरीर पर प्रतिकूल यानी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और इसके लिए हमें तुरंत मेडिकल जांच की आवश्यकता हो सकती है। कुछ मामलों में मेटल टोक्सिसिटी लोगों की मृत्यु का कारण भी हो सकती है। हालांकि, यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है और आप कुछ लक्षणों के जरिए पहचान कर सकते हैं।

कमलाराजा अस्पताल की गायनोक्लोजिस्ट डा नेहा गुप्ता बताती हैं कि जब यह मेटल गर्भवती महिला के शरीर में दूषित हवा या पानी के माध्य से प्रवेश करते हैं तो वह बच्चे के लिए खतरा बनते हैं। हैवी मेटल के कारण गर्भपात तक हो जाता है। वाहन व फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। यही कारण है कि ग्वालियर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 170 बना हुआ है। वाहन व फेक्ट्री से निकलने वाले धुआं से वातावरण में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। जिसका असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है, खासकर गर्भवती महिला व उसके पेट में पल रहे शिशु पर। प्रदूषण के कारण शरीर में आक्सीजन की कमी आ आती है। जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। खून में आक्सीजन की कमी से बच्चा हाइपोक्सिया का शिकार बन सकता है, उसका मस्तिष्क क्षतिग्रस्त होने के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार बन सकता है। सांस के द्वारा शरीर में हैवी मेटल पहुंचने पर गर्भपात महिला का गर्भपात,प्री-मैच्युअर डिलेवरी,बच्चे का वजन कम होने संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं।

गायनोक्लाजिस्ट डा नेहा गुप्ता का कहना है कि वातावरण में जिस तरह से प्रदूषण बढ़ रहा है उसका असर भी दिखाई दे रहा है। यदि हम जिले की बात करें तो हर दिन ग्वालियर में एक सैंकड़ा से अधिक गर्भपात व कारीब 15 से 20 समय से पहले डिलेवरी हो रही हैं। इनका कारण भी कहीं न कहीं प्रदूषण है। प्रदूषण का कारण दूषित हवा ,पानी या भोजन हो सकता है। क्योंकि शुद्ध हवा, पानी और खाना की उपलब्धता में गिरावट आ रही है। जिला अस्पताल में पदस्थ् गायनोक्लोजिस्ट डा रानी कुशवाह का कहना है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से गर्भपात हो सकता है। महिला पुरुष के दोंनो में फर्टिलिटी में कमी आ सकती है। खून में आक्सीजन की कमी से मां को अस्थमा की शिकायत हो सकती है जिसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है। बच्चा कमजोर हो सकता, मां को खून की कमी हो सकती है, खून में आक्सीजन की कमी आ सकती है। यह सब दूषित वायु में सांस लेने पर शरीर में हैवी मेटल मौजूदगी जब बढ़ती है तो यह समस्याएं खड़ी हाे सकती हैं।

Posted By: anil tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close