ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ट्रेनों में टॉयलेट की दुर्गन्ध से यात्रियों को मुक्ति दिलाने के लिए रेलवे अब वेंचुरी उपकरण लगाने वाला है। यह उपकरण एग्जास्ट फेन के सिद्धांत पर काम करता है, मतलब स्वच्छ हवा को खींचकर दुर्गन्ध को बाहर फेंकता है। इसके लिए टॉयलेट के दरवाजों के नीचे रोशनदान बनाए जाएंगे। वेंचुरी उपकरण के लिए रेलवे ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। यदि प्रयोग सफल रहता है तो अन्य ट्रेनों में भी शुरूआत की जाएगी।

शुरूआत में करीब 1044 कोचों में यह वेंचुरी उपकरण लगाए जाने की योजना है। जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया आखिरी चरण में है। झांसी मंडल से निकलने वाली करीब 25 से ज्यादा ट्रेनों में करीब 508 कोच लगे हैं, जिनमें यह उपकरण लगाए जाएंगे। एक वेंचुरी उपकरण पर करीब 3 हजार का खर्च आना बताया जा रहा है। ग्वालियर से संचालित होने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस में रेलवे की उत्कृष्य योजना के तहत कुछ खास बदलाव किए गए हैं। शौचालय में वेंचुरी उपकरण भी इसी बदलाव में शामिल हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक किसी पाइप में द्रव्य का प्रवाह होने पर पाइप के पतले हिस्से में द्रव्य का दबाव कम हो जाता है, जिसे वेंचुरी प्रभाव कहते हैं। वेंचुरी उपकरण बरनोली के सिद्धांत पर काम करता है।

यह ट्रेने होती है संचालितः झांसी-इटारसी पैंसेजर, झांसी आगरा पैसेंजर, बांदा पैसेंजर, कानपुर पैसेंजर, झांसी लखनऊ पैसेंजर, झांसी खजुराहो पैसेंजर, चंबल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस आदि ट्रेनों का संचालन झांसी मंडल से होता है।