ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट की युगल पीठ ने भिंड जिले की मालनपुर नगर पंचायत के वार्ड आरक्षण को निरस्त कर दिया है। वार्डों के आरक्षण में नियमों का पालन नहीं किया गया था। 50 फीसद से ज्यादा वार्ड आरक्षित कर दिए थे।

गोहद निवासी अशोक शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरीश दीक्षित ने तर्क दिया कि मालनपुर नगर पंचायत में वार्ड आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। नगर पंचायत के 15 में से 10 वार्ड को आरक्षित कर दिया, जबकि सिर्फ 7 वार्ड ही आरक्षित हो सकते हैं। जिसमें 6 अनुसूचित जाति- जनजाति के लिए आरक्षित हो सकते हैं। एक वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो सकता है। नगर पंचायत के 15 में से 6 वार्ड 6 अनुसूचित जाति- जनजाति के लिए आरक्षित किए गए हैं। 4 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए हैं। आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता व शासन के तर्क सुनने के बाद मार्च में फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है।

पहचानने से किया इनकार डीएनए में हुई दुष्कर्म की पुष्ट

विशेष सत्र न्यायालय में एक महिला ने दुष्कर्म के आरोपित को पहचाने से इनकार कर दिया, लेकिन जब उस मामले की डीएनए रिपोर्ट आई तो उसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। गिरवाई थाने में एक महिला ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। महिला ने राजू व दिलीप पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। चालान में दिलीप पाल पर दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं बताया गया। कोर्ट में जब पीड़िता के बयान हुए तो उसने दुष्कर्म की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। जब इस मामले की डीएनए रिपोर्ट आई तो दिलीप पाल के डीएनए की पुष्टि हुई। दिलीप पाल ने दुष्कर्म किया है।

Posted By: anil.tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local