ग्वालियर। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने शहर में फैली गंदगी को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शहर में सीवर उफन रहे हैं। गलियों में कचरा फैला पड़ा है। स्वच्छता की रैंकिंग में भी शहर पिछड़ गया है। स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा है कि अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं।

नगर निगम खुद से सफाई करने लगे या फिर उनके अधिकारियों को कोर्ट दंड देना शुरू कर दे। इसलिए एक सप्ताह में नगर निगम सफाई का प्लान पेश करे। याचिका की सुनवाई अब 18 मार्च को होगी। अवधेश सिंह भदौरिया ने हाईकोर्ट में अक्टूबर 2018 में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि शहर मलेरिया और डेंगू के प्रकोप की गिरफ्त में आ चुका है, जो कि एक महामारी का रुप लेता जा रहा है। शासन और नगर निगम महामारी को रोकने के लिए कतई गंभीर नही है। जगह-जगह गंदगी फैली पड़ी है। नगर निगम व शासन ने डेंगू व मलेरिया को लेकर अपने-अपने जवाब पेश किए थे।

शासन ने अपने जवाब में बताया कि शहर में 2018 में मलेरिया के 394 तथा डेंगू के 1131 मामले सामने आए थे। नगर निगम ने कहा था कि शहर में सफाई की जा रही है और डो टू डोर कचरा उठाया जा रहा है। इन आंकड़ों पर याचिकाकर्ता भदौरिया ने आपत्ति दर्ज कराई थी। साथ ही कहा कि शासन और नगर निगम के दावे झूठे हैं। वर्ष 2018 में हजारों की संख्या में मलेरिया और डेंगू से पीड़ित मरीज ग्वालियर में आए थे। हर घर में कोई न कोई सदस्य मलेरिया अथवा डेंगू से पीड़ित रहा। यह आंकड़ा हजारों की संख्या में है। शासन ने सिर्फ सरकारी अस्पताल के आंकडे पेश किए हैं। जबकि प्राइवेट पैथोलॉजी की स्थिति भयावह है।

एक-एक पैथोलॉजी पर हजारों की संख्या में पीड़ित मरीज पाए गए। इसके अलावा नगर निगम ने फॉगिंग और दवाई, सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की। सोमवार को याचिकाकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि डेंगू व मलेरिया का प्रकोप खत्म नहीं हो पाया है। शहर स्वाइन फ्लू की चपेट में आने लगा है। नगर निगम व शासन के पास इस बीमारी से निपटने के लिए संसाधन नहीं है। न गंभीरता से ले रहे हैं। कोर्ट ने शहर में फैली गंदगी पर चिंता जताई है।

गंदगी की वजह से 31 पायदान लुढ़क गया है शहर

- केन्द्र सरकार ने 7 मार्च को 4237 शहरों की स्वच्छता रैंकिंग जारी की थी। ग्वालियर शहर 31 पायदान नीचे खिसककर 59 वें नंबर पर पहुंच गया। गंदगी के कारण शहर की रैकिंग गिरी है। इस मामले को कोर्ट ने संज्ञान

में लिया है।

- शहर में डोर टू डोर कचरे की गाड़ी तीन दिन बाद लोगों के घरों तक पहुंच रही है। घर में कचरा सड़ने की वजह से लोग खुले में फेंकने लगे हैं। प्लाटों पर कचरा फेंका जा रहा है।

- निगम ने जहां भी कचरे के ठिए बनाए हैं, उन जगहों पर कचरे का ढेर लगा हुआ है। गलियों में भी हालत खराब है।

- सीवर लाइन चौक होने पर कई दिनों तक लोगों की सुनवाई नहीं होती है। इस कारण सड़कों पर सीवर का पानी फैलता रहता है।

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