विजय सिंह राठौर. ग्वालियर (नईदुनिया)। Hindi Diwas 2020 : मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार के विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में हिंदी में भाषण देकर राष्ट्रभाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया था। हिंदी के प्रति उनके प्रेम को इस उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। उनका सपना था कि ग्वालियर में हिंदी भवन का निर्माण हो। इसके लिए उन्होंने जीते-जी काफी प्रयास किए। ग्वालियर के अपने साहित्यकार साथियों से उन्होंने यहां तक कहा कि 'क्या मेरे मरने के बाद बनेगा हिंदी भवन'। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उनके निधन के साल भर बीत जाने के बाद हिंदी भवन के लिए आवंटित भूमि पर घास-फूस नजर आती है।

अटल जी के पैतृक निवास शिंदे की छावनी में ही रहने वाले और उनके काफी करीबी साहित्यकार शैवाल सत्यार्थी कहते हैं कि मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के पदाधिकारी और अटलजी के निकटस्थ रहे साहित्यकार उनसे दिल्ली में मिलने गए थे। इस दौरान अटलजी ने हिंदी भवन की बात छेड़ दी। अपेक्षित प्रगति न होने पर उन्होंने बड़े दुखी मन से कहा था, 'क्या मेरे मरने के बाद ग्वालियर में हिंदी भवन बनेगा? मैं खुद हिंदी भवन बनाने के लिए 1-2 करोड़ रुपये का सहयोग दे सकता हूं। सत्यार्थी बोले- अटलजी का सपना कहें या अंतिम इच्छा, हिंदी भवन का न बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा। मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के सह मंत्री संजय जोशी ने बताया कि हिंदी भवन निर्माण में देरी स्थानीय स्तर पर ही हो रही है। नगर निगम 2004 में आवंटित हुई जमीन का नामांतरण करने के लिए 14 साल का संपत्तिकर मांग रहा है। हमने छूट दिए जाने मांग की थी, लेकिन मामला अटका हुआ है।

2018 में राशि स्वीकृत हुई फिर सरकार चली गई

संजय जोशी ने बताया कि 2018 में शिवराज सिंह सरकार ने हिंदी भवन के निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी थी। इसी बीच उनकी सरकार चली गई। मार्च 2020 में शिवराज सिंह फिर सीएम बने, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी।

हां, नामांतरण लंबित है, राशि दिलाने का प्रयास करेंगे

ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर ने नईदुनिया को बताया कि नगर निगम में हिंदी भवन के नामांतरण का मामला लंबित है। जहां तक राज्य सरकार ने राशि स्वीकृत कर दी है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। अगर संस्था के पदाधिकारी राशि स्वीकृत होने की बात कर रहे हैं तो मैं इस संबंध में मुख्यमंत्री जी से बात करूंगा। मेरी जानकारी अनुसार हिंदी भवन के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू अपनी निधि से राशि उपलब्ध करा रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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