- 100 से ज्यादा अवैध कालोनी विकसित हो रही है, लेकिन ठहरी हुई है कार्रवाई

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर शहर में 700 से अधिक अवैध कालोनियां हैं, इन अवैध कालोनियों में पार्षदों एवं विधायकों सहित मंत्रियों ने अपनी मौलिक निधि से विकास कार्य करा दिए। इसके चलते अब शासन द्वारा अवैध कालोनियों को वैध कराने की लाई गई योजना में किसी भी कालोनी के लोगों ने इन्हें वैध कराने का आवेदन नहीं दिया है। हालांकि वैध और अवैध कालोनी में फर्क फिर मकान की परमिशन का है, वैध कालोनी में मकान की परमिशन नगर निगम से मिल जाती है। जबकि अवैध कालोनी में परमिशन नहीं मिलती है। बाकी के सभी शासकीय कार्य वैध और अवैध में बराबर हो रहे हैं। वहीं अवैध कालोनियों के निर्माण को रोकने के लिए नगर निगम ने बुधवार को तीन सप्ताह बाद बरा गांव में एक अवैध कालोनी पर कार्रवाई की थी।

नगरीय प्रशासन ने वर्ष 2000 से लेकर 2016 तक की अवैध कालोनियों को वैध कराने का प्रविधान रखा है। नगर निगम के अधिकारियों पर दवाब है कि वह ज्यादा से ज्यादा अवैध कालोनियों को वैध कराएं। लेकिन करीब चार माह से अधिक का समय बीत चुका है, एक भी अवैध कालोनी को वैध नहीं किया जा सका है। अवैध कालोनियों को वैध कराने के लिए वहां पर बचे हुए विकास कार्यो का हिसाब लगाकर उसमें से 50 प्रतिशत राशि आमजनों से नगर निगम में जमा कराई जानी है। इसके बाद 50 प्रतिशत राशि नगर निगम खर्च करेगा। इसके बाद इन अवैध कालोनियों को वैध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। इसके साथ ही अवैध कालोनियों में बने मकानों की भी कंपाउंडिंग हो सकेगी।

इन अवैध कालोनियों में पार्षदों ने अपनी मौलिक निधि से सीसी सड़क, सीवर लाइन, पानी की लाइन, स्ट्रीट लाइट आदि पहले ही बिछा दी है। इसके चलते इन कालोनियों में विकास कार्य बचे नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने शून्य का एस्टीमेट बनाकर भी प्रस्ताव तैयार किया है। इसके बाद भी लोग कालोनियों को वैध कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

भवन निर्माण अनुमति छोड़ हो रहे हैं सभी कार्य

वैध कालोनियों में हाउस टैक्स , पानी का बिल, नामातंरण , सीवर टैक्स आदि आमजनों से वसूले जाते हैं। यह सब टैक्स नगर निगम अवैध कालोनियों से भी वसूल रहा है। अवैध कालोनियों में भी मकानों के नामातंरण किए जा रहे हैं। सिर्फ भवन निर्माण की अनुमति अवैध कालोनियों में नहीं दी जा रही है।

अवैध कालोनियों पर तीन सप्ताह से बंद है कार्रवाई

अवैध कालोनियों के निर्माणों को रोकने के लिए नगर निगम ने कार्रवाई प्रारंभ की थी, लेकिन विगत तीन सप्ताह से यह कार्रवाई ठप्प पड़ी हुई है। नगर निगम ने अंतिम बार बड़ी कार्रवाई जिला पंचायत अध्यक्ष मनीषा भुजबल सिंह के पति भुजबल सिंह की अवैध कालोनी पर की थी। इसके बाद यह सभी कार्रवाई ठप्प हैं।

वर्जन

कालोनियों को वैध कराने का प्रस्ताव आमजनों की ओर से आना है, लेकिन कालोनी में लोग एक राय नहीं हो पा रहे हैं, हमने कई जगह आमजनों से बात भी की है और उन्हें समझाने का प्रयास भी किया है। वहीं वैध कालोनियों में भवन निर्माण की अनुमति दी जाती है। नगर निगम में साल भर के अंदर 1000 से 1200 के करीब अनुमति के लिए आवेदन आते हैं।

बीके त्यागी, सहायक सिटी प्लानर नगर निगम

Posted By: anil.tomar

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