ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वास्थ्य विभाग की सांठ गांठ से शहर में नियम कायदों को ताक पर रखकर निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में न तो नियमों का पालन न हो रहा है और न हीं इन अस्प्तालों पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है। असल में यह निजी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की अनेदेखी से मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर में 375 अस्पताल खुल चुके हैं। जिमें बेड की संख्या हजारों में पहुचं चुकी है। जबकि शहर में इतनी संख्या में डाक्टर तक मौजूद नहीं है। इससे साफ है कि बिना डाक्टर के ही अधिकांश अस्पतालसंचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही का खुलासा नईदुनिया पूर्व में कर चुकेा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन अस्प्तालों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं उठा सका। इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग की इजाजत से यह संचालित हो रहे हैं।

गली मोहल्लों में परचूने की दुकान की तरह अस्पताल खुल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग आंख बंद कर अस्पताल खोलने की परमिशन बांट रहा है। जबकि इन अस्पतालों में न तो डाक्टर न सुरक्षा इंतजाम। इसके बाद भी धड़ल्ले से अस्पताल संचालित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने जितने बेड की परमिशन दी अस्पतालों में उतने बेड भी नहीं है। इलेक्ट्रीकल एनओसी तो दूर की बात फायर एनओसी तक नहीं है। जबलपुर की तरह हादसा कभी भी हो सकता है। जिसका जिम्मेदार कौन होगा, स्वास्थ्य विभाग जो रेवढ़ी तरह नियम कायदों को ताक पर रखकर परमिशन बांट रहा, प्रशासन जो पूरी तरह से आंख मूंद कर बैठा है या फिर वो जो इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदकर अस्पताल के पंजीयन बांट रहा है। मरीज के लिए अस्पतालों का न तो रास्ता सुगम है और न हीं सुरक्षा के इंतजाम हैं। जबलपुर की तरह ग्वालियर में कभी भी हादसा हो सकता है। क्योंकि यहां के अस्पतालों के बुरे हालात हैं। 100 और 50 बेड के अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम तो दूर की बात है डाक्टर तक मौजूद नहीं थे। नईदुनिया टीम ने जब शहर के कुछ अस्पतालों की हकीकत देखी तो चौंक गए। क्योंकि कई अस्पतालों में मरीज दूसरी व तीसरी मंजिल पर भर्ती थे। जिसमें प्रवेश व निकासी का एक ही रास्ता था। आगजनी की घटना से बचाव के लिए न तो फायर फाइटिंग सिस्टम लगा मिला न कोई फायर एनओसी दिखा सका। गजब की बात यह थी कि बेसमेंट में जनरेटर व आक्सीजन सिलेंडर रखे गए थे जो हादसे का आमंत्रण थे। पर जिम्मेदार इससे बेखर हैं।

Posted By: anil tomar

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