ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार को भक्तो ने गणेश मंदिरों पर गणपति को मोदक का भोग लगा कर और घर पर तिल के गणेश बना कर पूजा अर्चना कर मनाई। संकष्टी चतुर्थी चन्द्र मास की पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाने की परंपरा है। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को बेहद प्रिय है इसीलिए चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की पूजा करना बहुत ही शुभ मंगलकारक माना जाता है।

माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतीर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को सकट चौथ, तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी, संकट चतुर्थी, सकट चौथ के नामो से जाना जाता है। शुक्रवार को संकष्टी चतुर्थी सौभाग्य योग में शहर के मंदिरों सहित घर घर में मनाई गई। इस दिन महिलाओं ने भी चतुर्थी ब्रत रखा और भगवान गणेश की विधिवत पूजा करके तिल के लड्डू, दूर्वा और पीले पुष्प गणेश जी को अर्पित किए। पूजा के उपरांत चन्द्र देव को दूध का अर्घ्य देकर परिवार की खुशहाली की कामना की। इस दौरान गणेश मंदिरों पर भी विशेष आयोजन किए गए। जिसमे अर्जी वाले गणेश मंदिर पर भंडारे, हवन, सहित भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार कर तिल के लड्डू का विशेष भोग लगाया गया। दोपहर में भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमे भक्तो को प्रशाद स्वरूप खिचड़ी, पूड़ी, सब्जी, और खीर का वितरण किया गया। वहीं कंपू स्थित उसरेटे सेन गणेश मंदिर में कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए मंदिर में हवन का आयोजन किया गया। जिसमेेें मंदिर समिति के सभी सदस्य शामिल हुए। खासगी बाजार स्थित मोटे गणेश मंदिर पर सुबह भगवान गणेश का अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान तिल से बने मोदक का गणेश जी को भोग लगाया गया। साथ ही भक्तो के लिए मंदिर के पट दिन भर खुले रहे।

Posted By: anil.tomar

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