Immunity Booster : ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना से बचने के लिए लोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं। घर में मौजूद तुलसी और रसोई में लहसुन, हींग, जीरा, काली मिर्च, अदरक जैसी दर्जनों सामग्री का सेवन जरूरत से अधिक कर रहे हैं। काढ़ा और इन इम्यूनिटी बूस्टर औषधियों का ओवर डोज रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बजाए स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। इस कारण लोग अपज, मुंह में छाले, उल्टी व दस्त के शिकार हो रहे हैं।

संतुलित भोजन बढ़ता है रोग प्रतिरोधक क्षमता

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. प्रवेश मिश्रा बताते हैं कि आजकल उनके पास पेट में गैस व मुंह में छालों की समस्या लेकर ज्यादा रोगी आते हैं। जांच में सामने आया कि यह लोग तरह-तरह का काढ़ा व इंटरनेट पर पढ़कर काली मिर्च, लौंग, छोटी पीपर जैसी हर्बल सामग्री का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जो की इनके रोग की जड़ है। जबकि एक स्वस्थ्य व्यक्ति को संतुलित भोजन में दाल, चावल, हरी सब्जी, सलाद एवं गेहूं की रोटी में यदि चने का आटा मिक्स हो तो वह भोजन पचाने में सहायक होता है। यह भोजन ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। लेकिन भोजन हमेशा संतुलित ही होना चाहिए। इसका अधिक सेवन भी परेशानी का कारण बनता है।

सीमित मात्रा में करें काढ़े में त्रिकटू चूर्ण का प्रयोग

आयुर्वेद के डॉक्टर बताते हैं कि जो लोग घर पर काढ़ा तैयार कर उसका अधिक मात्रा में व अनियमित सेवन कर रहे हैं उन्हें परेशानी आ सकती है। जैसे काढ़ा में त्रिकटू चूर्ण (काली मिर्च, सौंठ, छोटी पीपर) की मात्रा 100 एमएल काढ़े में आधा चम्मच पर्याप्त है। सामान्य व्यक्ति यदि इससे अधिक चूर्ण का सेवन करता है तो उसे दस्त व पेट में गैस बनने की समस्या आ सकती है। इसी तरह गिलोय के अधिक सेवन करने से पसीना आना, बीपी बढ़ने या घटने लगता है। एक स्वस्थ व्यक्ति दो समय में अधिकतम 120 एमएल काढ़े का सेवन कर सकता है। काढ़े का सेवन भी सिर्फ 30 दिन किया जाए। इसके बाद डॉक्टर से परामर्श के उपरांत ही इसका सेवन करें।

पोषक तत्वों का अधिक सेवन भी नुकसानदायक

पोषण एवं आहार विशेषज्ञ डॉ. नंदनी बाघमारे ने बताया कि ऐसे कई मामले मेरे पास आए, जिसमें लोगों ने अधिक मात्रा में अदरक, लहसुन लिया। जिस वजह से उनके पेट में जलन, उबकाई की परेशानी व अल्सर की शिकायत हुई। जिंक जैसे पोषक तत्व के लिए हल्दी, गिलोय जिस तरह से ले रहे हैं वह सही तरीका नहीं है। पोषक तत्वों का सेवन भी एक निर्धारित मात्रा में होना आवश्यक है। नहीं तो गैस, अपच व अन्य परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

केस-1 : आहार नली में जलन की शिकायत लेकर नई सड़क निवासी रमेश शर्मा डॉक्टर के पास पहुंचे। परीक्षण में सामने आया कि वे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरत से अधिक लहसुन, काली मिर्च, अदरक का सेवन कर रहे हैं। कच्चे लहसुन की चटनी खाने से पेट में अल्सर की आशंका होती है। जिस पर डॉक्टर ने उन्हें लहसुन का सेवन करने से रोक दिया।

केस-2 : मुंह में छाले की समस्या से परेशान बहोड़ापुर निवासी गोपाल सिंह बीते दिनों डॉक्टर के पास पहुंचे। जब उनकी दिनचर्या में लेने वाले भोजन के बारे में डॉक्टर ने पूछताछ की तो पता चला कि वे खाने में दाल चीनी का सेवन जरूरत से अधिक कर रहे हैं। जिससे वह बीमार न हों। अधिक सेवन करने से उनके मुंह में छाले हो गए थे।

काढ़ा या पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाते हैं, पर इनका अधिक सेवन अन्य परेशानियां खड़ी कर सकता है। इसलिए इनका सेवन निर्धारित मात्रा और निधारित समय में करना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है। डॉ. विवेक देवलिया, सहायक प्रोफेसर आयुर्वेदिक अस्पताल

Posted By: Nai Dunia News Network

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