ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिस दिन में आप हैं, उसे अपने जीवन का सबसे अच्छा दिन और समय मानिए। सबसे बुरा दिन कोई नहीं है। खुशियों से भरा हुआ लम्हा किसी खजाने से कम नहीं है। गम से भरा हुआ एक दिन अंधकूप से कम नहीं है। जिंदगी जीने का मकसद होना चाहिए। अपने आप पर भरोसा होना चाहिए, जीवन में खुशियों की कमी नहीं है। दु:ख में से भी सुख खोजा जा सकता है। यह विचार मुनिश्री विनय सागर महाराज ने सोमवार को माधौगंज स्थित लक्कड़खाने में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

मुनिश्री ने कहा कि आप धैर्यशील बनें। यदि कोई दो कड़वे शब्द कह दे तो क्रोधित न हों और तनाव में न आएं, क्योंकि पत्थर उसी पेड़ को मारे जाते हैं, जिस पर मीठे फल लगते हैं। आपके अंदर कुछ तो खास है, इसलिए तो दुनिया की नजर आपके ऊपर है। किसी के बुरा कहने पर आप अपने आप को बुरा कभी न मानें। दिमाग झूठ बोल सकता है, मगर दिल हमेशा सत्य बोलता है। दुनिया की सबसे बड़ी अदालत आपका स्वयं का दिल हैं।

शहर के मंदिरों के दर्शन किए: प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विनय सागर महाराज युवा भक्तों के साथ पद विहार कर दौलतगंज जैन मंदिर, मामा का बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने जिनेंद्र भगवान के दर्शन किए। मुनिश्री जहां-जहां से निकाले वहां गुरुभक्तों ने पादप्रक्षालन व आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर उमेश जैन, चक्रेश जैन, ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन, राजेश जैन लाला और अजय जैन आदि मौजूद थे।

पहले हमें आराधना का अर्थ समझना होगाः हम मनुष्य गति के जीव हैं, इसलिए सतर्क हैं, लेकिन फिर भी हम दुर्गति में जाने के काम करते हैं। चेतना का आकार निराकार होता है। सिद्धाें के साथ हमें जुड़ना है। उनकी आराधना और गुणागान करना है। इसके साथ हमें आराधना का अर्थ भी समझना होगा। सिद्धाें को जानने, उनके वैभव और स्वरूप को समझने के लिए हमें सिद्धचक्र महामंडल विधान का अध्ययन करना होगा। यह विचार आर्यिका विशुद्धमति माता की शिष्या विज्ञमति माता ने सोमवार को चंपाबाग धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जीवन में धर्म और संस्कार दोनों जरूरी हैं। इनके बिना जीवन अधूरा है। प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि आर्यिका विशुद्धमति माता ससंघ के मार्गदर्शन में सात से 13 जुलाई तक श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चंपाबाग बगीची में होगा। इस बीच आर्यिका संघ के चातुर्मास की कलश स्थापना 12 जुलाई को तेरापंथी धर्मशाला नई सड़क पर होगी। आर्यिका संघ चातुर्मास के दौरान चंपाबाग में विराजित रहेगा

Posted By: vikash.pandey

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