ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में गांजा, स्मैक और एबिल इंजेक्शन के काकटेल की जकड़ में टीनेजर्स और युवा फंस रहे हैं। नशे का जहर टीनेजर्स और युवाओं की नसों में घुल रहा है, यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो खतरनाक है। शहर के मनोचिकित्सक और नशा मुक्ति केंद्रों तक नशा छोड़ने के लिए पहुंचाने वाले आंकड़े चौंकाते हैं, एक आंकलन के मुताबिक हर महीने औसतन 300 से ज्यादा युवा नशा छोड़ने के लिए मनोचिकित्सक व नशा मुक्ति केंद्रों में पहुंच रहे हैं। लगातार यह आंकड़ा बढ़ रहा है। तीन साल पहले तक यह संख्या हर माह 100 से 150 के बीच रहती थी, जो अब बढ़कर 300 से ज्यादा पहुंच गई है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है- जितने भी लोग नशा छोड़ने के लिए डाक्टरों की मदद ले रहे हैं, उसमें करीब 30 प्रतिशत तक 15 से 18 साल के बीच की उम्र वाले हैं। नईदुनिया ने मनोचिकित्सकों के पास पहुंचने वाले युवा और टीनेजर्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया, साथ ही केस स्टडी की। जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में पढ़िए…किस उम्र के युवा और टीनेजर्स सबसे ज्यादा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, क्यों इन्हें नशे की लत लग रही है और इन्हें कैसे नशे के जहर से बचाया जा सकता है।

1- 150 मरीजों के आंकड़ें में से 80 प्रतिशत नशेड़ियोंं की उम्र 15 से 40 वर्ष के बीच थी। इसमें भी करीब 30 प्रतिशत टीनेजर्स थे, यानी इनकी उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच थी। बाकी की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच थी। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों के भी रहने वाले थे, यह शराब की लत से सबसे ज्यादा ग्रसित थे।

2- कालेज और स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं भी नशे की आदी हो रही हैं, जयारोग्य अस्पताल की ओपीडी में ऐसी 6 छात्राएं इलाज के लिए आईं, जिन्हें शराब और स्मैक की लत थी, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई।

3- डा.उदैनिया ने बताया पिछले दो साल में कोटा में पढ़ने गए और नशे की लत के कारण यहां लौटे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे छात्रों का इलाज उनके यहां चल रहा है।

शहर: शहर के जो टीनेजर्स और युवा नशे की गिरफ्त में थे, वह बीड, स्मैक, एबिल इंजेक्शन की लत में थे। शराब महंगी आती है, इसलिए यह लोग सूखा नशा करते हैं। शहर में सबसे ज्यादा टीनेजर्स और युवा ही नशा छोड़ने पहुंचे।

ग्रामीण: मनाेचिकित्सक डा.उदैनिया ने बताया कि 26 मरीज ऐसे थे, जो ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले थे। ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा शराब की लत से ग्रसित लोग इलाज के लिए आते हैं।

भविष्य, सामाजिक प्रतिष्ठा सब बर्बाद:

1- ग्वालियर का रहने वाला 26 वर्षीय युवक, जो सिंगर था। वह एल्बम बनाने के लिए मुंबई गया, वहां उसे काम मिल गया। पैसा कमाने लगा, हाई सोसायटी की पार्टी में सूखे नशे की लत लग गई, अब वह गांजा, स्मैक और एबिल इंजेक्शन के काकटेल का नशा करता है। उसका इलाज माता-पिता करा रहे हैं।

2- शिवपुरी की छात्रा, जो तैयारी करने दिल्ली गई थी। वहां उसके दोस्त गांजा का नशा करते थे, उसे भी लत लग गई। अब वह शिवपुरी लौट आई, यहां लत पूरी करने के लिए घर से रुपये चोरी करने लगी। माता-पिता ने डांटा तो आत्महत्या करने की कोशिश की। अब उसकी काउंसलिंग चल रही है, दवाएं दी जा रही हैं।

ऐसे लगती है नशे की लत: पहले दोस्तों के साथ एक या दो बार कोई भी मादक पदार्थ लेते हैं, फिर उतनी मात्रा लेने की आदत बन जाती है। कुछ समय बाद मस्तिष्क में रिसेप्टर्स की संख्या बढ़ जाती है, फिर नशे की और मात्रा बढ़ा देते हैं। जब इससे भी नशा नहीं होता तो काकटेल लेने लगते हैं।

ऐसे पहचानें बच्चे नशे की गिरफ्त में:

-व्यवहार में परिवर्तन, अधिक गुस्सा या चिड़चिड़ा होना

-अधिक समय बच्चे एकांत में बिताएं, परिवार से दूर रहें

-घर के अंदर रहने से ज्यादा समय बाहर बिताएं

-बाहर से घर आकर सीधे कमरे में जाना

-अचानक पैसों की अधिक डिमांड करना

-आंख लाल होना, शरीर में कंपन, सुस्त रहना, जीभ लड़खड़ाना। यह संकेत हैं, जिससे स्पष्ट होता है बच्चा किसी नशे की गिरफ्त में है।

ऐसे बचाएं नशे से:

-बच्चे को समय दें, अगर वह पार्टी करने का शौकीन है, बाहर खाना खाने का शौकीन है ताे पेरेंट्स खुद उसके साथ बाहर जाएं।

-बच्चों से ज्यादा से ज्यादा बात करें, जिससे वह हर बात शेयर करें।

-बच्चों को स्वतंत्रता दें लेकिन उन पर निगरानी भी रखें

-उन्हें यह अहसास कराएं, वह परिवार के लिए कितने जरूरी हैं।

-अगर बच्चा किसी नशे की गिरफ्त में है तो तत्काल मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराएं, जरूरत पड़ने पर दवाएं दिलाएं, फिर हर समय उस पर निगाह रखें, जिससे वापस वह ऐसे लोगों की संगत में न पड़ सके जो नशा करते हैं।

Posted By: vikash.pandey

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