- नौ खदान संचालकों को खनिज विभाग ने दिया था नोटिस, लेकिन नहीं मिला जवाब

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। गिटटी व पत्थर खनन की नौ खदानों को खनिज विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस ताे जारी कर दिए लेकिन विभाग ने मुड़कर नहीं देखा कि क्या हुआ। इन खदानों पर खनन के बाद स्थल को खुला छोड़ दिया गया था जोकि खतरा बन गई हैं। नोटिस में लिखा गया है कि 15 दिन के अंदर इनका भराव कराया जाए और फेसिंग कराई जाए। इसमें शंकरपुर,मउ और शताब्दीपुरम की खदानें शामिल हैं। वर्षा के मौसम में इन खदानों में हादसे भी सामने आते हैं और इसको लेकर हर बार दावा किया जाता है कि खदान संचालकों पर कार्रवाई होगी। कार्रवाई न के बराबर हो पाती है।

रेत के अवैध कारोबार के लिए बदनाम ग्वालियर और चंबल संभाग में सरकार के प्रतिबंध का कोई असर नहीं है। प्रतिबंध अवधि में सरकारी सिस्टम की साठगांठ से यह धंधा फल फूल रहा है। ग्वालियर में अवैध खनन के खेल के कारण ही इस बार महज 12 करोड़ में रेत के ठेके हुए हैं। असल में रेत का काम करने वाले कारोबारी आना ही नहीं चाहते हैं। यहां ग्वालियर में ग्वालियर बाइपास पर रेत का जबर्दस्त खेल चल रहा है, अवैध खनन करके ट्रालियों को हाईवे किनारे खड़ा कर दिया जाता है। ढाबों के पीछे चुपचाप डंपिग कर दी जाती है। यहां तक कि बड़े वाहनों में भी परिवहन हो रहा है। बेखौफ रेत का कारोबार हाईवे किनारे चल रहा है, मंडी बना दी गई हैं, ढाबों के पीछे बड़े बड़े ग्राउंड में डंपिंग की जा रही है। यह हालात तब है जब डंपिंग के लिए जिले में एक भी लाइसेंस नहीं है। रेत को लेकर खनिज विभाग कहता है कि अमला नहीं है, प्रशासन व पुलिस इस मामले में इच्छाशक्ति के साथ काम नहीं करता है, यही कारण है कि अवैध खनन-परिवहन का दाग मिटता नहीं है।

Posted By: anil tomar

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