- भारी-भरकम बिल से राहत के लिए लोगों में बढ़ी सोलर रूफटाप की चाहत

- अधिक लोग इससे जुड़ सकें, बढाई जा रही ट्रांसफार्मर की क्षमता

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में भारी भरकम बिल से राहत के लिए शहर के लोगों में सोलर रूफ टाप की चाहत बढ़ने लगी है। 840 लोगों ने अपनी छतों पर सोलर रूफ टाप से बिजली बनाना शुरू कर दी है। इनका बिल शून्य हो गया है और उल्टा कंपनी इनकी कर्जदार बन रही है। शहर के बड़े उपभोक्ता इसी विकल्प को अपना रहे है। ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी छतों पर बिजली का उत्पादन कर सकें, उसके बिजली कंपनी भी अपने वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ा रही है। क्योंकि ट्रांसफार्मर की क्षमता के 30 फीसद लोड तक ही सोलर रूफ टाप स्वीकृत किए जा सकते हैं। यदि यह लोड पूरा हो गया तो सोलर रूफ टाप के लिए नेट मीटरिंग का कनेक्शन नहीं मिलेगा।

हर साल बिजली कंपनी के टेरिफ में बढ़ोतरी हो रही है। जो बड़े उपभोक्ता हैं, उनके यहां एसी का अधिक उपयोग होने लगा है, जिससे भारी भरकम बिल हो गया है। उन्होंने औसतन आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल भरना पड़ता है। इस बिल से छुटकारा पाने के लिए लोग सोलर रूफ टाप लगवा रहे हैं। 840 लोगों ने सोलर रूफ टाप लगवाया है, उनका स्वीकृत लोड सात हजार 500 किलोवाट था। ये उपभोक्ता जितनी बिजली जला रहे हैं, उससे ज्यादा बनाकर बिजली कंपनी को दे रहे हैं। इसके चलते उनका पास काफी क्रेडिट इकट्टा हो गई है। इस कारण बिल नहीं भरना पड़ता है। लश्कर व सिटी सेंटर क्षेत्र में इसे लगवाने वालों की संख्या अधिक है।

ऐसे मिलता है कनेक्शन

- सोलर रूफ टाप लगाने के लिए अलग से कनेक्शन मिलता है। इस मीटर में आपने कितनी बिजली बनाकर दी और कितनी बिजली का उपयोग घर में किया। बिजली उत्पादन व खपत दिखती है। उत्पादन कम किया है और खपत ज्यादा की है। जो अंतर आएगा, उसका बिल देना पड़ेगा। यदि खपत कम की है और बिजली ज्यादा बनाई है। अंतर क्रेडिट में जुड़ जाता है।

- जैसे कि कोई ट्रांसफार्मर 100 केवी का है। उस पर अधिकतम 30 किलोवाट का सोलर रूफ टाप स्वीकृत कर सकते हैं। 10-10 किलोवाट के तीन स्वीकृत हो गए तो चौथे व्यक्ति को कनेक्शन नहीं मिलेगा।

- सर्दियों में अधिकतर बिजली क्रेडिट में आती है। क्योंकि खपत कम हो जाती है।

इतना खर्च आता है लगाने में

- एक किलोवाट का सोलर रूफटाप लगाने में 65 से 70 हजार रुपये का खर्च आता है।

- जो व्यक्ति एसी का उपयोग करते हैं वह 3 किलोवाट तका सोलर रूफ टाप लगाते हैं।

- बिजली कंपनी सोलर रूफ टाप लगाने पर घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी देती है। लेकिन यह अभी बंद है। इसलिए लोगों को अपने खर्च पर ही इसे लगाना पड़ रहा है।

इतनी बिजली बनाते हैं सोलर रूफ टाप

1 किलोवाट- 4 से 5 यूनिट प्रतिदिन

5 किलो वाट- 20 से 25 यूनिट प्रतिदिन

10 किलोवाट- 45 से 50 यूनिट प्रतिदिन

इतनी जगह की जरूरत

1 किलोवाट का सोलर रूफ टाप लगाने के लिए 80 फुट जगह की जरूरत होती है।

5 किलोवाट के लिए 500 फुट की जरूरत होती है।

10 किलोवाट के लिए 800 फुट की जरूरत होती है।

एक बार सोलर लगने के बाद 25 साल तक बिजली देता है।

इससे ये फायदे

- सोलर रूफ टाप अब ऊंचाई पर लगाया जा रहा है, जिससे छत का उपयोग बंद नहीं होता है। गर्मियों में छत ठंडी रहती है। छांव होने से ठंडी गर्म नहीं हो पाती है।

- यह पर्यावरण के लिए अच्छा है। 12 घंटे तक खुद की बिजली बनाते हैं तो पावर प्लाटों से लोड कम होगा।

- बिजली का बिल शून्य हो जाता है। एक बार ही जेब पर भार आता है, उसके बाद 25 साल तक बिल भरने के झंझट से मुक्ति है।

इनका कहना है

- लोग सोलर रूफ टाप की ओर आकर्षित हुए। 30 फीसद लोड तक सोलर रूफ टाप लगाने की अनुमति रहती है। इसलिए ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ा रहे हैं, जिससे ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। लोग खुद की बिजली बनाएंगे तो कंपनी पर लोड कम होगा।

नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक सिटी सर्कल

- जब लोग इसे लगवाने की कीतम सुनते हैं तब उन्हें महंगा लगता है। इसलिए संकोच कर जाते हैं, लेकिन जिन्होंने लगवा लिया है, उन्हें बिजली के बिल से बड़ी राहत है। जिनके यहां बिजली की खपत अधिक है, वह इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

अर्पित कटारे, वेंडर सोलर रूफ टाप

Posted By: anil.tomar

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