International Family Day: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बढ़ते हुए शहरीकरण ने ही शहर में संयुक्त परिवार की परंपरा को धीरे-धीरे समाप्त करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण परिवेश से लेकर आधुनिकीकरण की होड़ के चलते परिवारों के बीच दूरियां पैदा हो रही हैं। इसके अलावा बेहतर रोजगार की तलाश भी दूरियों का कारण बन रही है। एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद बच्चों की अपने माता-पिता से नहीं बन रही है। वहीं पति-पत्नी के बीच इंटरनेट मीडिया व मोबाइल के चलते अनबन हो रही है। इस तरह के मामले वरिष्ठजनों के भरण-पोषण से लेकर कुटुंब न्यायालय में काउंसलरों के सामने आ रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस आज मनाया जा रहा है। इस वर्ष इसकी थीम परिवार एवं शहरीकरण निर्धारित की गई है, लेकिन असलियत यह है कि बेतरतीब शहरीकरण ने शहरों में संयुक्त परिवारों को अलग-अलग करना शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि आधुनिकीकरण व भौतिक संसाधन जुटाने की होड़ व इंटरनेट मीडिया के बढ़ते चलन ने पति-पत्नी के रिश्तों में भी दरार डालना शुरू कर दिया है। अब संयुक्त परिवार ग्रामीण इलाकों में ही पाए जाते हैं। शहर के समाजशास्त्रियों के अनुसार वर्तमान में ग्वालियर के शहरी क्षेत्र में आसपास के अन्य जिलों के ग्रामीण परिवेश के लोगों ने अपने भवन बनाकर रहना शुरू कर दिया है। शहर के गोला का मंदिर, दीनदयाल नगर, महाराजपुरा, वायु नगर आदि वे इलाके हैं, जहां अधिकतर परिवार भिंड जिले से आकर बसे हैं। वहीं पुरानी छावनी, बहोड़ापुर, आनंद नगर में मूलरूप से मुरैना के निवासी परिवारों ने आकर अपने आवास बना लिए हैं। इसके अलावा शहर के जिन परिवारों का नाम संयुक्त परिवार के तौर पर लिया जाता था, उनके सदस्य भी अब अलग-अलग रहने लगे हैं।

प्रतिदिन टूट रहीं छह शादियांः शहर के महिला थाने सहित कुटुंब न्यायालय में प्रतिदिन वैवाहिक विवादों से संबंधित 25 से 30 मामले पहुंचते हैं। इनमें से प्रतिदिन औसतन छह तलाक शहर में हो रहे हैं। काउंसलरों के मुताबिक इनमें भी अधिकतर मामले इंटरनेट मीडिया पर चैटिंग, फोटो अपलोड करने और कमेंट से जुड़े हुए हैं। ज्यादातर प्रकरणों में स्थिति यह है कि पति-पत्नी अपने मोबाइल का पासवर्ड तक एक-दूसरे से साझा करने के लिए राजी नहीं होते हैं।

बंटवारा किया, तो रोटी को मोहताजः काउंसलर अंशुमान शर्मा के मुताबिक वर्तमान में वरिष्ठजनों के भरण-पोषण के मामलों में यह मुख्य बात देखने में आ रही है कि उन्होंने अपने जीते जी अपनी संपत्ति का बंटवारा कर दिया या फिर अपनी संपत्ति अपने इकलौते बेटे के नाम कर दी। संपत्ति मिलने के बाद स्थिति यह हो जाती है कि बुजुर्ग रोटी के लिए मोहताज हो जाते हैं। ऐसे में वे यही सलाह देते हैं कि जीवित रहते हुए बंटवारा बच्चों में करने के बजाय संपत्ति अपने नाम पर ही रखें।

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वर्तमान में एसपी आफिस, महिला थाने में आने वाले पति-पत्नी के बीच विवाद के प्रकरणों में इंटरनेट मीडिया का उपयोग मुख्य कारण बनकर सामने आ रहा है। इसमें पति-पत्नी को एक-दूसरे के मोबाइल के पासवर्ड तक साझा करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे विवाद में हम उन्हें समझा-बुझाकर काउंसिलिंग करते हैं।

अंशुमान शर्मा, काउंसलर

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वर्तमान में शहर में संयुक्त परिवारों की संख्या कम हुई है। बाहर से देखने पर भले ही हमें एक ही छत के नीचे कई पीढ़ियां रहती हुई दिख रही हों, लेकिन अंदर से उनमें भी भेद हैं। दूसरी ओर संयुक्त परिवारों की महत्ता को अन्य देश पहचान रहे हैं। यही कारण है कि यूरोप में संयुक्त परिवारों का चलन बढ़ रहा है।

प्रो. अयूब खान, समाजशास्त्री

Posted By: vikash.pandey

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