अधिकारी बोले- भोपाल पुलिस को बताया

ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दिल्ली से चोरी गई कार पर इंदौर की नंबर प्लेट लगाकर घूम रहे जिन दो चोरों को पड़ाव पुलिस ने पकड़ा, उन्हें 24 घंटे भी थाने में नहीं रखा। इन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इसके पीछे पुलिस अधिकारियों का तर्क है- जमानती अपराध की धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई थी, इसलिए इन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया। अब सवाल उठता है, जब इन्हें इंटरस्टेट चोर बताया गया है, इनके पास से जो कार बरामद हुई उसमें नंबर प्लेट तक दूसरे शहर की लगी थी तो पुलिस ने इन्हें कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर क्यों नहीं लिया। इनसे उस आरोपित के बारे में जानकारी मिल सकती थी, जिनसे चोरी की गाड़ी खरीदी थी। कई बड़े खुलासे भी हो सकते थे। अब इस मामले में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

पड़ाव पुलिस ने शुक्रवार को चेकिंग के दौरान एक क्रेटा कार पड़ी थी, जिस पर इंदौर की नंबर प्लेट लगी हुई थी। जब इस कार को रोककर पड़ताल की गई तो पता लगा कि यह कार दिल्ली एनसीआर से चोरी हुई थी। जबकि इस पर नंबर प्लेट इंदौर की किसी कार के नंबर की लगी हुई थी। इसके बाद इन्हें हिरासत में लिया गया और एफआइआर दर्ज की गई। इनके नाम विशाल साहू, नीलेश पुरी हैं। दोनों ही भोपाल के रहने वाले हैं। जब इनसे पूछताछ हुई तो बताया कि रविंद्र गिरी निवासी सौरभ कालोनी, भोपाल, स्टेशन बजरिया से कार खरीदी थी। अब इस कार्रवाई में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने आइपीसी की धारा 379, 411, 414 के तहत एफआइआर दर्ज की है। लेकिन इन्हें 24 घंटे भी हिरासत में नहीं रखा न ही इन्हें कोर्ट में पेश किया। पड़ाव थाना पुलिस ने नोटिस थमाया और इन्हें छोड़ दिया। न तो कार बेचने वाले के संबंध में पूछताछ की न ही काल डिटेल निकलवाई, ग्वालियर आने के पीछे की कहानी नहीं पूछी। चोरी की गाड़ी क्यों खरीदी इस बारे में कोई पड़ताल नहीं की।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया इंटरस्टेट चोर, थाना प्रभारी बोले- इन पर तो चोरी की गाड़ी खरीदने की धारा में एफआइआर की, फिर चोर क्यों बताया?: पुलिस की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई, जिसमें इन दोनों युवकों को इंटरस्टेट चोर बताया, संदेही बदमाशों के मौजूद होने की सूचना पर कार्रवाई करने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दी लेकिन जब थाना प्रभारी से इन्हें छोड़ने की वजह पूछी तो बोले- यह तो कार खरीदने वाले थे। इन पर चोरी का माल खरीदने की धारा में एफआइआर दर्ज की है। अब सवाल है, अगर इन पर चोरी की कार खरीदने में एफआइआर हुई तो प्रेस विज्ञप्ति में इंटरस्टेट चोर क्यों बताया। इसलिए यह पूरी कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है।

कार पर लिखा था पुलिस, यह क्यों लिखा: पुलिस के अनुसार इन्होंने सिर्फ चोरी का वाहन खरीदने का अपराध किया है तो इन लोगों ने कार पर पुलिस क्यों लिख रखा था। इस संबंध में न तो पुलिस ने पूछताछ की और न ही इसका जवाब किसी के पास है।

पूछताछ के लिए रिमांड पर ले सकते थे: कानून के जानकारों का कहना है, इस मामले में पूछताछ के लिए कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जा सकता था। भलें ही अपराध में नोटिस देकर छोड़ा जा सकता है, लेकिन रूलिंग यह है कि अगर विवेचक को लगता है, उससे पूछताछ जरूरी है तो उसे रिमांड पर लिया जा सकता है।

वर्जन:

जिन दो युवकों को पकड़ा गया है, उन्होंने चोरी की कार खरीदी थी। इसके चलते उन पर 411 और 414 के तहत एफआइआर दर्ज की है। आरोपितों को नोटिस देकर छोड़ दिया गया, क्योंकि नोटिसेबल अपराध है। इस संबंध में भोपाल पुलिस को भी सूचना दी है।

विवेक अष्ठाना

थाना प्रभारी, पड़ाव

Posted By: anil tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close