Karva Chauth 2021: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक, करवा चौथ रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। श्रंगार का सामना खरीदने के लिए शनिवार को शहर के बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिली। रविवार को महिलाएं व्रत रखेंगी, जिसका पारण रात 8:11 बजे चंद्रोदय के बाद किया जाएगा। चंद्र दर्शन करने के बाद महिलाएं अपने पति का चेहरा देखकर एवं उसके हाथ पानी पीकर अपना व्रत खोलेंगी।

ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सभी विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु एवं दांपत्य जीवन में प्रेम तथा भाग्योदय के लिए व्रत करती हैं। इस दिन महिलाएं वैवाहिक जीवन सुखमय होने की कामना से पूरे दिन निर्जला व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ रखती हैं। 5 साल बाद करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र में चांद का पूजन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके करेंगी। इससे पहले 8 अक्टूबर 2017 को रविवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में चांद का पूजन हुआ था। इस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ रविवार का दिन होने की वजह से सूर्य देव का भी व्रती महिलाओं को आशीर्वाद मिलेगा। ज्योतिष में चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी है। रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा के उदय होने से पति पत्नी में प्रेम और सुख बढ़ेगा। इसलिए रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा की पूजा अर्चना विशेष फलदाई होगी। पूजा शाम 5:40 से 6:47 तक रहेगी, लेकिन ग्वालियर अंचल में चंद्रोदय 8:11 पर होगा। इस समय चंद्रमा को अर्घ देना शुभकारी रहेगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण के सुझाव से द्रोपति ने भी करवा चौथ का व्रत किया था। इसके बाद ही पांडवों को महाभारत युद्ध में विजय मिली।

मान्यता: करवे की टोंटी से निकलेगा जाड़ाः मान्यता है कि धातु से बने करवे से चौथ के चंद्रमा का पूजन करना फलदाई होता है, लेकिन यथाशक्ति मिट्टी के करवे से भी पूजन किया जा सकता है। इस दिन के बाद से ही ठंड शुरू हो जाती है। कहा जाता है कि करवे की टोंटी से ही जाड़ा निकलता है और धीरे-धीरे वातावरण में ठंड का अहसास बढ़ जाता है।

Posted By: vikash.pandey

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