मनीष शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह माने जाते हैं। शनि को अपनी राशि चक्र को पूरा करने में लगभग 30 साल का समय लगता है। साल 2022 में शनि का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। जिसमे शनि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के इस राशि परिवर्तन से कुछ राशियों पर इसका असर देखने को मिलेगा। इस दौरान कुछ राशियों को शनि की ढैय्या और साढ़े साती का सामना करना पड़ सकता है।

ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार पुरी ने बताया कि अगले वर्ष 2022 में 22 अप्रैल को शनि राशि परिवर्तन करेंगे। जब वे मकर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इसके साथ ही धनु राशि पर साढ़े साती समाप्त होकर मीन राशि पर प्रारंभ हो जाएगी। शनि की साढ़े साती और ढैय्या जीवन में कई मुश्किलें पैदा करती हैं। इससे मुक्त राशियां राहत महसूस करती हैं। शनि की टेढ़ी नजर राजा को रंक बना देती है। आने वाले 10 वर्षों में 2022 से 2031 तक में 5 राशियां कर्क, सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक जातकों पर शनि की साढ़े साती नहीं रहेगी। इनमें से कुछ को शनि की ढैय्या का प्रभाव जरूर झेलना पड़ सकता है। जिनकी कुंडली में शनि अच्‍छे हैं, उनके लिए शनि की दोनों स्थितियां यानी शनि की साढ़े साती और ढैय्या दोनों ही शुभ फल देंगी।

ऐसे समझें शनि की साढ़े साती और ढैय्या कोः शनि की साढ़े साती साढ़े सात वर्ष की होती है। यह ढाई-ढाई वर्ष के तीन भागों में विभाजित होती है। जिसमे कुल मिलाकर साढ़े सात वर्ष होते हैं। शुरू के ढाई वर्ष यह सिर पर, उसके बाद ढाई वर्ष पेट पर और अंतिम ढाई वर्ष पैर पर होती है। जिसमे उतरती हुई साढ़े साती शुभ फल देकर जाती है। इसी तरह ढैय्या भी ढाई वर्ष की होती है, जो तीन भागों में विभाजित होकर क्रमश सिर, पेट और पैर पर होती है।

शनि की शांति के लिए करें ये उपायः शनि की साढ़े साती एवं ढैय्या से प्रभावित जातकाें काे भगवान भैरव की उपासना करना चाहिए, उनकाे ॐ भैरवाय नम: मंत्र का जाप करने से राहत मिलेगी। शनि की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं। तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ, और जूता दान देना चाहिए। साथ ही कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएं। छायादान करें- अर्थात कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल लेकर अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में अपने पापो की क्षमा मांगते हुए रख आएं। दांत साफ रखें। अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखें। मंत्र- ॐ शं शनैश्चराय नम: का पाठ करें।

नाेटः इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

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