विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। ज्ञान, जानकारी और बुद्धि तीनों अलग-अलग चीज है। ज्ञान और जानकारी की चोरी हो सकती है, जबकि बुद्धि की नहीं होती। ज्ञानी व्यक्ति हमेशा लड़ाई-झगड़े से दूर रहता है। सूखी दाल पीसने पर आवाज आती है, लेकिन गीली दाल पीसने पर आवाज नहीं आती। हमारी आत्मा भी ज्ञान से गीली हो, तो लड़ाई-झगड़े नहीं होते हैं।

यह विचार मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने सोनगिर स्थित में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि ज्ञानी जहां भी रहेंगे, वहां झगड़े नहीं होगें। चाहे वह घर हो, मोहल्ला हो अथवा देश हो। धन को भी वही संभाल सकता है, जिसके पास बुद्धि होती है। पत्नी को श्रीमती और पति को श्रीमान कहते हैं। श्री में लक्ष्मी का और मति बुद्धि का रूप है, जबकि श्रीमान में धन के साथ सम्मान जुड़ा है। लक्ष्मी खड़ी रहती हैं, जबकि ज्ञान और बुद्धि बैठे मिलते हैं। मुनिश्री ने कहा कि ज्ञान की आराधना करने वाले के पास धन खुद चला आता है। ज्ञान से बढ़कर कुछ नहीं होता। दूसरे के ज्ञान पर उत्साहित ना हो, क्योंकि संसार में अपना ज्ञान ही अपने काम आता है, दूसरों का नही।

भक्तांमर महामंडल विधान का शुभारंभ

सोनागिर में शनिवार को 501 दीप जलाकर भक्तांमर महामंडल विधान का शुभारंभ किया गया। गाजे बाजे के साथ भट्टारक कोठी से मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज एवं आचार्य श्री धर्म भूषण जी महाराज का कार्यक्रम के लिए प्रवेश हुआ। वहीं शाम 6 बजे चंद्रप्रभ सभा में मुनिश्री ने मुख्यविंद से 48 भक्तामर के काव्य का वाचन कर बाहर से पधारे जैन समाज के श्रद्धालुओं ने दीपक प्रज्वलित किए। 501 दीपाें से भक्तांमर दीपोत्सव संगीतकार महेंद्र एंड पार्टी पाली द्वारा भजनों पर झूमते हुए आचार्यश्री और मुनिश्री की आरती की गई।

Posted By: vikash.pandey

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