ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना महामारी को लेकर लोगों मंे थ्योरी बन गई थी कि 14 दिन के बाद व्यक्ति में एंटीबॉडी विकसित हो जाती है। जिसके बाद दूसरी बार संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है, लेकिन अब यह थ्योरी गलत साबित होती दिख रही है, क्योंकि जयारोग्य अस्पताल में बतौर माइक्रो वायरोलाजी में पदस्थ लैब टेक्नीशियन महिला दूसरी बार संक्रमित हो गई है।

कोरोना महामारी के दौरान जरा सी लापरवाही लोगों की जान आफत में पहुंचा रही है। कोरोनाकाल के दौरान लोग बिना मास्क और बिना सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन किए घूम रहे हैं, लेकिन लोगों को जब शारीरिक परेशानी होने लगती है तब समझ आता है कि उन्होंने कितनी बड़ी लापरवाही कर दी। वहीं कुछ लोगों को पता भी नहीं चलता कि वह कोरोना पाजिटिव हैं, लेकिन जांच में वह पाजिटिव पाए जा रहे हैं। इस दौरान ऐसे लोग लगातार दूसरों के संपर्क में रहते हैं, जिसके कारण अन्य लोग कोरोना संक्रमित हो जाते हैं।

ये लोग निकले संक्रमित

सुरेश नगर निवासी 45 वर्षीय महिला और उनका बेटा कोरोना पाजिटिव पाए गए हैं। इनके परिवार के सदस्यों को पहले कोरोना संक्रमण हुआ था। इसके बाद जब इन्होंने जांच कराई तो यह भी संक्रमित पाए गए। वहीं दिल्ली मंे नौकरी करने वाला युवक कुछ समय पहले ही ग्वालियर आया था। यहां इसको बुखार आ रहा था। इस पर उसने कोरोना की जांच कराई तो संक्रमित निकला। इसी प्रकार सिटी सेंटर निवासी 24 वर्षीय युवती और उसका 19 वर्षीय भाई भी कोरोना पाजिटिव पाए गए हैं। युवती को कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन उनकी नौकरी लग गई थी। ज्वाइंनिग से पहले कोरोना की रिपोर्ट लाने के लिए कार्यालय से कहा गया। इसके चलते उन्होंने जांच कराई, जिसमें वह पाजिटिव पाई गई। वहीं कलेक्ट्रेट में कार्यरत बाबू भी संक्रमित पाया गया है। थाटीपुर में रहने वाले कलेक्ट्रेट में बाबू को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। जांच कराने पर वह कोरोन से संक्रमित मिले।

Posted By: anil.tomar

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