मनीष शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक पातक दोष मान्य नहीं होगा। शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैया, महादशा अंतर्दशा से पीड़ित जातकों को उपाय करने से मिलेगी राहत। हाल ही में सबसे लंबी अवधि वाला चंद्र ग्रहण लगा था। इस खगोलीय घटना के 15 दिन बाद अब शनिवार 4 दिसंबर को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। साल 2021 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण होगा। खास बात यह है। कि सूर्य ग्रहण के समय शनिचरी अमावस्या का संयोग होगा।

बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डा. सतीश सोनी के अनुसार सूर्य ग्रहण विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष मास शनिचरी अमावस्या को लग रहा है। इसका प्रभाव वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र तथा जेष्ठा नक्षत्र में सबसे अधिक रहेगा। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 3 दिसंबर दोपहर 4:55 से होगा, जो कि शनिवार को दोपहर 1:12 तक रहेगा। वहीं जिन जातकों की राशि में शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैया, शनि की महादशा या अंतर्दशा विपरीत चल रही है। वे जातक शनिचरी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष तथा शमी के वृक्ष की पूजा के साथ दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करें। साथ ही सरसों के तेल का दान। सरसों की खली,पीना का तुलादान करना भी लाभकारी रहेगा। भारतीय समय अनुसार सूर्य ग्रहण का समय 4 दिसंबर दिन शनिवार प्रातः 10:59 से लेकर दोपहर 3:07 तक रहेगा।

कहां-कहां देखा जा सकेगा ग्रहणः यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी स्थान पर दिखाई नहीं देगा, लेकिन आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, मोरोसिस में इस ग्रहण को देखा जा सकेगा।

तेल, अभिषेक करने के लिए शनि मंदिरों में उमड़ेगी भीड़ः ऐति गांव में स्थित विश्व प्रसिद्ध शनि मंदिर पर शनिचरी अमावस्या पर शनि देव के अभिषेक के लिए जातकों की भीड़ जुटेगी।साथ ही शनि पीड़ा से पीड़ित जातक इस दिन ऐति गांव स्थित शनि मंदिर पर केशों का दान करते हैं एवं तेल का तुलादान तथा जूता चप्पलों का दान कर शनि पीड़ा से मुक्ति की कामना करेंगे । इसके साथ ही शहर में बहोड़ापुर, कटी घाटी ,गुप्तेश्वर के ऊपर ,थाटीपुर आदि शनि मंदिरों पर भी जातकों की भीड़ रहेगी।

Posted By: vikash.pandey

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