ग्वालियर,(नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर में 75 साल से अधिक समय से रामलीला का मंचन कर रही श्रीरामलीला समारोह समिति ने परंपरागत रूप से नगर में दशहरा नहीं निकालने का फैसला किया है। समिति से जुड़े लोग दशहरा नहीं निकालने के पीछे अलग-अलग कारण बता रहे हैं। आयोजन समिति से जुड़े लोग दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं कि दशहरा नहीं निकलने का मूल कारण पैसे की कमी भी है।

दरअसल श्रीरामलीला के आयोजन पर 25 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान था। इसमें चल समारोह का खर्च भी शामिल था। चंदा केवल 70 प्रतिशत आने की उम्मीद है। जबकि आयोजन समिति से नगर के बड़े व्यापारी जुड़े हैं। जिनमें कई नाम ऐसे हैं, जो कि अकेले ही श्रीरामलीला का पूरा खर्च उठाने का सामर्थ्य रखते हैं। समिति के कार्यक्रम संयोजक रमेश अग्रवाल व कोषाध्यक्ष विजय गोयल पैसे की कमी को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रैफिक व रूट बड़ा होने के कारण दशहरा नहीं निकालने का फैसला किया गया है।

श्रीरामलीला समारोह समिति द्वारा नगर में 75 वर्षों से छत्री मैदान में रामलीला का मंचन भव्य एवं आकर्षण रूप से किया जा रहा है। आजादी से पहले सिंधिया राजघराने का बड़ाैदा के समकक्ष हाथी-घोड़ों के साथ दशहरा निकलता था। आजादी के बाद श्रीरामलीला का मंचन शुरू किया गया। श्रीरामलीला का एक आकर्षण दशहरा पर निकलने वाला चल समारोह होता था। दशहरा देखने के लिए लोग घंटो बाड़े पर स्टेट बैंक, डाकघर की सीढ़ियों पर परिवार के साथ बैठकर दशहरा निकलने का इंतजार करते थे। मार्ग में लोग काफी संख्या में जमा होते थे। कोरोना संक्रमण काल को छोड़ दे तो दशहरा अनवरत रूप से परंपरागत रूप से निकलता रहा है।

इस बार नहीं निकलेगा चल समाराेहः कार्यक्रम संयोजक पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विजय गोयल (अध्यक्ष चैंबर आफ कामर्स) व संगठन सचिव रामनारायण मिश्रा ने बताया कि इस बार समिति ने दशहरा नहीं निकालने का फैसला किया है। जबकि आयोजन समिति द्वारा प्रकाशित बुकलेट में दशहरा का मार्ग भी दर्शाया गया है। आयोजकों का कहना है कि उस बुक लेट से उस भाग पर काली स्याही लगा दी गई है। कार्यक्रम संयोजक व कोषाध्यक्ष ने दशहरा नहीं निकलने के दो कारण बताए हैं, जिसमें पहला इस बार श्रीरामलीला स्थल फूलबाग किए जाने के कारण रूट बड़ा हो रहा है और इस रूट का एक बड़ा हिस्सा खाली है। दूसरा अगर दशहरा निकाला जाता है तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी, लोग परेशान होंगे, क्योंकि माता के विसर्जन के चल समारोह भी निकलते हैं। यह दोनों ही कारण लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं। क्योंकि इस बार चल समारोह नई सड़क, हनुमान चाैराहा से छत्री मैदान में ले जाने की जगह गश्त के ताजिये से सीधे राममंदिर, फालका बाजार, शिंदे की छावनी होकर चल समारोह को सीधे फूलबाग मैदान ले जाया सकता है। दूसरा ट्रैफिक व्यवस्था, लेकिन पुलिस ने आयोजन समिति से ट्रैफिक को लेकर चल समारोह नहीं निकालने का कोई अनुरोध नहीं किया है।

मूल कारण चंदे में कमीः आयोजन समिति का अनुमान है कि श्रीरामलीला के मंचन पर 25 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें पांच लाख रुपये की राशि चल समारोह की शामिल है। बाजार से किए गए चंदे में अब तक केवल 16 से 17 लाख रुपये जमा होने का अनुमान हैं। यह राशि रामलीला के मंचन में भी कम पड़ रही है। इसलिए आयोजन समिति अपेक्षा के अनुरूप बाजार से चंदा नहीं मिलने के कारण दशहरा नहीं निकलने का फैसला किया है।

चंदा देने के लिए होड़ रहती थीः पांच से छह दशक पूर्व नगर सेठों में श्रीरामलीला के मंचन के लिए चंदा देने के लिए होड़ रहती थी। पूछकर देते थे, उनके प्रतिद्वंदी ने कितना चंदा दिया है। अगर प्रतिद्वंदी ने 21 हजार रुपये दिए हैं, तो दूसरा प्रतिद्वंदी खुशी-खुशी 31 व 51 हजार की रसीद कटवाता था।

यह बड़े नाम जुड़े आयोजन समिति सेः मुख्य संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, महापौर शोभा सिकरवार, सतीश सिकरवार, प्रद्युम्न सिंह तोमर, विवेक नारायण शेजवलकर, प्रशांत मेहता, आदिल बापुना अध्यक्ष विष्णु गर्ग, स्वागताध्यक्ष राधेश्याम भाकर, महासचिव विमल जैन, कार्यवाहक स्वागत अध्यक्ष यश कुमार गोयल, कोषाध्यक्ष विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष सत्यप्रकाश मिश्रा, कार्यक्रम सह संयोजक मरेश चौरसिया, सुरेश बंसल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत गुप्ता, अजय बंसल, दीपक जैन, नरेंद्र मंगल, स्वागत सचिव पीतांबर लोकवानी, सुधीर गुप्ता वीरेंद्र बापना, अरविंद अग्रवाल (चैंबर आफ कामर्स के पूर्व अध्यक्ष)सुरेश कालरा, नवीन माहेश्वरी, पारस जैन(मुरार) जीडी लड्ढा, डा वीरेंद्र गंगवाल जैसे प्रतिष्ठत व्यापारी आयाेजन समिति से जुड़े हुए हैं।

Posted By: vikash.pandey

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