ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में अपनी पिछली रैंकिंग से तीन पायदान लुढ़कने के बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार अफसर अब भी सबक नहीं ले रहे हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए लगाए गए वाहनों की जीपीएस से निगरानी के लाख दावे किए जाएं, लेकिन हकीकत यह है कि अब भी कई इलाकों में प्रतिदिन ये कचरा कलेक्शन वाहन नहीं पहुंच रहे हैं। इसके चलते लोग खुले में कचरा फेंकने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

स्वच्छता की परीक्षा में पिछड़ने के बाद भी निगम का अमला सुधरने के लिए तैयार नहीं है। अभी से ही स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 के मानकों पर निगम को कार्य करना होगा, तभी आने वाले समय में शीर्ष 10 शहरों में जगह बनाई जा सकती है। निगम को सबसे ज्यादा नुकसान गार्बेज फ्री सिटी की श्रेणी में हुआ है। इसके बावजूद अब भी कई इलाकों में घरों से वाहन प्रतिदिन कचरा कलेक्ट नहीं कर रहे हैं। इससे शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं और गंदगी को लेकर आमजन भी परेशान हैं। शहर के गोल पहाड़िया एबी रोड, ढोली बुआ का पुल, लक्ष्मीगंज मंडी सहित जीवाजीगंज, भीमनगर, शिवाजी नगर, मुरार संतर, बिरला नगर क्षेत्र, सेवा नगर, रमटापुरा, घासमंडी, इंस्ट्रीयल एरिया, कांच मिल के पीछे वाहन प्रतिदिन नहीं पहुंचते हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में यदि निगम को सफलता पाना है तो कचरे का अलग-अलग क्षेणी में संग्रहण, सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर सफाई, जलस्रोत जैसे नाले-नालियों में ठोस कचरा प्रवाहित होने से रोकना, नाले-नालियों में अतिक्रमण नहीं होने देना, 100 प्रतिशत कचरे को ढंककर परिवहन करना, स्वच्छता कार्य से जुडे कर्मचारियों को दक्ष बनाना, कचरा कम करने व पुन: उपयोग पर फोकस करना, अनुपयोगी सामाग्री से वंडर पार्क बनाना, शादी विवाह व सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में जीरो वेस्ट को लेकर संदेश देना, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराना होगा।

Posted By: anil tomar

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