ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। By Election Madhya Pradesh: अंचल में उपचुनाव का शंखनाद हो चुका है। जिले के 6 विधानसभा क्षेत्रों में से 3 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व व डबरा (अजा) सीट पर चुनाव में किसका मुकाबला किस से होना है, यह तस्वीर लगभग साफ हो गई है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में चुनाव होने हैं। डबरा व ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में चेहरे पुराने हैं। बस इस चुनाव में उनके दल व चुनाव चिन्ह बदले हुए हैं। दल बदलने के कारण दोनों ही दलों के उम्मीदवार भितरघात की आशंका से डरे हुए हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भितरघात को कंट्रोल करने के लिए मदद मांग रहे हैं। सबसे अधिक भितरघात की आशंका ग्वालियर व ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में है। डबरा विधानसभा क्षेत्र भी भितरघात के संक्रमण से अछूता नहीं है। भाजपा व कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन स्थिति कंट्रोल में नहीं है।

ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र

ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भाजपा के तय उम्मीदवार हैं। उपचुनाव में प्रद्युम्न सिंह तोमर भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। प्रद्युम्न सिंह तोमर इस बात से आशंकित हैं कि नए दल के लोग उनका साथ कितनी ईमानदारी के साथ देंगे? ट्वीटों ने प्रद्युम्न की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस उम्मीदवार सुनील शर्मा को भी भितरघात का डर सता रहा है। बदली हुई परिस्थितियों में ब्राह्मण, ठाकुर व पिछड़े वर्ग के नेताओं ने ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी की थी। इन लोगों से कांगे्रस उम्मीदवारों को भितरघात का डर है। कुछ कांग्रेसी प्रद्युम्न सिंह के साथ भाजपा में चले गए। नए लोगों पर प्रद्युम्न सिंह तोमर भी दिल से भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र

ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल भाजपा के तय उम्मीदवार हैं। अभी पूर्व से कांग्रेस ने उम्मीदवार तय नहीं किया है, लेकिन मुन्नालाल गोयल का मुकाबल चिर प्रतिद्वंदी सतीश सिकरवार से होने की संभावना है। पूर्व से भाजपा के कई स्थापित नेताओं के राजनीतिक भविष्य को लेकर उम्मीदें हैं। मुन्नालाल गोयल के आने से यह उम्मीदें क्षीण होती नजर आ रही हैं। इसलिए संदेह है कि नए दल में मुन्नालाल गोयल को अपेक्षाओं के अनुरूप जगह मिल पाएगी कि नहीं? दूसरी तरफ कांग्रेस से भी उम्मीदवारों की लंबी सूची थी। पूर्व मंत्री सहित 45 नेता टिकट की कतार में थे। यह लोग कैसे सतीश सिकरवार को पचा पाएंगे? इसको लेकर कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल है।

डबरा (अजा) विधानसभा क्षेत्र

डबरा विधानसभा क्षेत्र से महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी इस बार भाजपा से उम्मीदवार हैं। पिछले तीन चुनाव इमरती देवी कांग्रेस से लड़कर जीत चुकी हैं। पिछले 16 साल से इमरती देवी के विरोध में खड़े भाजपा नेता अब एकाएक इमरती देवी के लिए वोट मांगने के लिए जनता के बीच जाने में हिचक रहे हैं। दूसरी तरफ इमरती देवी से पुराने सहयोगी तितर-बितर हो गए हैं। इसलिए भितरघात की आशंका से भाजपा भी सहमी हुई है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 2 साल पहले इमरती देवी के साथ भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए सुरेश राजे को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन कांग्रेसी उन्हें अभी दिल से स्वीकार नहीं कर पाए हैं। इसलिए कांग्रेस में भी भितरघात की आशंका है।

डैमेज कंट्रोल का प्रयास कर रहा है नेतृत्व

भाजपा पिछले दो माह से नाराज नेताओं को मनाने में लगी है। प्रदेश नेतृत्व के नेता रूठों के घर जाकर संवाद कर रहे हैं। भाजपा काफी हद तक नाराज लोगों को मनाकर वापस लाने में सफल हुई है, लेकिन अब भी कितने मन से वापस लौट रहे हैं, इसमें संदेह है। दूसरी तरफ कांग्रस के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ टिकट घोषित करने से पहले स्थानीय क्षत्रपों से उम्मीदवार की पूरी मदद की गारंटी लेने के बाद ही उम्मीदवारी घोषित कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी व कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र शर्मा जिले में भितरघात की आशंकाओं को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिन परिस्थितियों में चुनाव हो रहे हैं, उनके कार्यकर्ता सिर्फ जीत को लक्ष्य मानकर मैदान में हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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