ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि। Madhya Pradesh by elections : उपचुनाव पर शिवराज सरकार का भविष्य टिका हुआ है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कमल नाथ सरकार को गिराने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिए वचन से बंधा हुआ है। इसलिए उपचुनाव में सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए भाजपा में आए पूर्व मंत्रियों व विधायकों को टिकट मिलना तय है। इससे क्षेत्र के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। कांग्रेस भी भाजपा से बदला लेने की रणनीति बना रही है।

कांग्रेस नेताओं की नजर भाजपा में उपेक्षा के शिकार नेताओं पर है। इस बात का आभास भाजपा नेतृत्व को भी है। इसलिए इन नेताओं को भोपाल बुलाकर इनके गिले-शिकवे दूर कर संगठन को मजबूत करने के लिए त्याग और बलिदान का पाठ पढ़ाया जा रहा है। पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा की मंगलवार की रात को राज्यपाल लालजी टंडन से हुई मुलाकात को इसी से जुड़कर देखा जा रहा है। अब सतीश सिकरवार का भी 2 जून तक के लिए भोपाल का ई-पास बन गया है। सतीश ग्वालियर पूर्व से दावेदारी छिनने पर संगठन से इसकी भरपाई की बात कर सकते हैं।

अनूप व सतीश पर थी कांग्रेस की नजर

संगठन में पिछले कुछ समय से हासिए पर चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के भांजे व पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा पिछले सवा साल से होम क्वारंटाइन हैं। इसलिए माना जा रहा था कि वह संगठन से नाराज हैं।

हालांकि भोपाल रवाना होने से पहले अनूप मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी को यह कहकर छिपाने का प्रयास कि वह पिछले चुनाव में पराजय के बाद वह अपने सिंद्धात के कारण राजनीतिक गतिविधियों से कुछ दूरी बना ली थी। लेकिन उनका ऑफिस निरंतर काम कर रहा है।

लोगों की समस्याओं का शासन व प्रशासन स्तर पर सुलझाने का प्रयास करते रहते हैं। इसी तरह विधानसभा चुनाव में सतीश सिकरवार को ग्वालियर पूर्व में लगातार काम करने के बाद टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा था।

जबकि पूरा परिवार भाजपा में लंबे समय से आस्थावान हैं और संगठन के लिए तन-मन-धन से समर्पित रहता है। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ पूर्व से विधायक मुन्नालाल गोयल के आ जाने से फिलहाल उनकी पूर्व से दावेदारी की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गईं। जबकि पराजय के बाद भी अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। पूर्व के लिए कांग्रेस की नजर अनूप व सतीश पर थी। अनूप मिश्रा को मना लिया गया है। सतीश का भोपाल से बुलावा आ गया है। सतीश से जब सवाल किया कि क्या संगठन उनसे भी त्याग और बलिदान मांग रहा है। तो वह मुस्कुराकर खामोश हो गए।

उपचुनाव में संगठन के सामने अंसतोष भी बड़ी चुनौती

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके घोर विरोधी रहे पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, प्रभात झा, गुना-शिवपुरी सांसद केपी सिंह यादव, विधायक वीरेंद्र रघुवंशी अंदरूनी तौर पर खुश नहीं हैं। क्योंकि इनकी राजनीति महल के विरोध पर केंद्रित हैं। यह लोग सार्वजनिक रूप से खामोश हैं और सिंधिया के भाजपा में शामिल होने का गुढ़ अर्थ वाले सियासी शब्दों के साथ स्वागत भी कर चुके हैं। लेकिन इनके शब्दों में नाराजगी झलक रही है। संगठन के सामने इन नेताओं को मनाना बड़ी चुनौती है। ऐसा माना जा रहा है कि बदले हुए समीकरणों में यह नेता एक दूसरे के नजदीक आ गए हैं और संपर्क में भी हैं।

नरेंद्र सिंह तोमर समर्थक भी रूठे हुए

महामंत्री पद से अध्यक्ष पद पर कमल माखीजानी को पदोन्नात किए जाने के तरीके से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से जुड़े साडा अध्यक्ष जय सिंह कुशवाह, पूर्व अध्यक्ष देवेश शर्मा,रामेश्वर भदौरिया,वेद प्रकाश शिवहरे शरद गौतम सहित 200 से अधिक लोग रूठे हुए हैं। कमल की नियुक्ति का सार्वजनिक रूप से विरोध करने के साथ अपनी नाराजगी से प्रदेश नेतृत्व को अवगत करा चुके हैं।

गिले-शिकवे दूर किए जा रहे हैं

संगठन के सामने इन नेताओं के स्वयं के भविष्य को लेकर आशंकाओं को दूर करने के साथ इनके गिले-शिकबे दूर करना बड़ी चुनौती है। संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी, इसे नाराजगी व पार्टी के अंदर कोई विवाद नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि भाजपा बड़ा परिवार है। और परिवार में यह सब कुछ सामान्य हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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