ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। Madhya Pradesh News पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 43 साल पुराना इतिहास आखिर दोहरा दिया?

पूरे प्रदेश की निगाहें मध्‍य प्रदेश के घटनाक्रम पर टिकी थीं

इस मसले पर उनके गृह जिले में हीं नहीं समूचे प्रदेश में सबकी निगाहें टिकी हुई थी। उल्‍लेखनीय है कि1967 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया के इशारे पर कांग्रेस के 36 विधायकों ने पार्टी छोड़कर प्रदेश में डीपी मिश्रा की सरकार गिरा दी थी।

अपमान को मुद्दा बनाकर ज्‍योतिरादित्‍य ने अपनी अलग राह चुन ली

उसी राह पर उनके नाती ज्योतिरादित्य सिंधिया खड़े थे। कांग्रेस में हुए अपमान व सीएम के कमल नाथ के अपमान के चार शब्द- उतरते हैं तो उतर जाएं से आहत संधिया ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वॉइन कर लीं। उनके समर्थन 6 मंत्री व 18 विधायकों ने कांग्रेस से नाता तोड़कर से कांग्रेस की सरकार संकट में आ गईं।

फलोर टेस्‍ट से पहले ही कमल नाथ ने छोड़ दिया अपना पद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार की शाम 5 बजे से पहले सीएम कमल नाथ को फ्लोर टेस्ट का सामना करना था लेकिन इससे पहले ही कमल नाथ ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए राज्‍यपाल लालजी टंडन को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया।

दिग्विजय सिंह ने दे दिए थे संकेत

इससे यह बात साफ हो गई कि महल ने 43 साल पुराना इतिहास दोहरा दिया। उल्‍लेखनीय है कि गत 20 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ग्वालियर स्टेशन पर मीडिया से चर्चा करते हुए 47 साल के पूर्व के महल के इतिहास का उल्लेख कर आने वाले संकट के संकेत दिए थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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